(MISTLETOE) अमरबेल प्रकृति का अनोखा चमत्कार है, जो बिना जड़ों के भी जीवित रहती है। सुनहरे धागों जैसी दिखने वाली यह बेल जिस पेड़ पर फैलती है, उसका रस चूसकर जीवन जीती है। आयुर्वेद में इसे शक्तिशाली औषधि माना गया है। यह बालों को मज़बूत बनाती है, त्वचा रोगों में लाभ देती है और लीवर-किडनी को डिटॉक्स करती है। इसके अलावा धार्मिक मान्यताओं में भी अमरबेल का विशेष स्थान है। इसे भगवान् शिव और विष्णु को अर्पित किया जाता है और यह अमरत्व का प्रतीक मानी जाती है।
स्वास्थ्य आयुर्वेद विशेषज्ञ बतलाते हैं कि अमरबेल लीवर को डिटॉक्स करने में सहायक है और यह किडनी की कार्य प्रणाली को सुधरता है तथा उन्हें स्वस्थ बनाए रखती है। यह त्वचा रोगों में भी बेहद लाभकारी होती है। अमरबेल का लेप लगाने से खुजली, दाद, एक्जिमा और अन्य त्वचा रोगों से राहत मिलती है। यह त्वचा की रंगत को निखार कर उसे चमकदार बनती है और घाव भरने में भी मददगार है। अमरबेल को पीसकर लेप लगाने से घुटनों और जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है। इसमें आयरन, कैल्शियम और विटामिन सी पाया जाता है जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है.
अमरबेल का उपयोग कैसे करें?
अमरबेल का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। अमरबेल को काटकर नारियल या सरसों के तेल में उबाल लें और जब तेल गाढा हो जाए, तो ठंडा करके बोतल में भर लें। इससे बालों की मालिश करने पर बाल झड़ना बंद होते हैं। अमरबेल को पीसकर उसका लेप लगाकर भी उपयोग किया जा सकता है, इसे काढ़े के रूप में ज़्यादा उपयोग किया जाता है। एक मुट्ठी अमरबेल को पानी में उबालकर उसका काढ़ा बनाएं और इसे छानकर हल्का गुनगुना पीने से पाचन और लीवर मज़बूत होता है। अमरबेल को पीसकर हल्का गुनगुना कर घुटनों पर लेप लगाने से आराम मिलता है।





























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