कानपुर। मानसून के चलते उत्तरप्रदेश के जिलों में सर्पदंश के मामलों में तेजी आई है। लगातार बारिश से जहरीले जीव-जंतुओं के बिलों में पानी भर रहा है, जिससे ये जीव भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर आने लगे हैं। इसके कारण ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई हैं। सर्पदंश की वजह से एक महीने में 32 लोगों की मौत हो चुकी है।
झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें
जून माह से अब तक कानपुर के आसपास के जिलों में 32 लोगों की जान जा चुकी है। चित्रकूट में आठ, बांदा में सात, जालौन में चार, फतेहपुर व महोबा में तीन-तीन, हमीरपुर व उन्नाव में दो-दो, फरुर्खाबाद, इटावा व कन्नौज में एक-एक मौत हुई है। चिकित्सकों के अनुसार झाड़ फूक के चक्कर में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। अगर समय से इलाज मिल जाए तो जान बच सकती है।
लगवाएं एंटी स्नैक वेनम
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. बीपी प्रियदर्शी ने सुझाव दिया है कि झाड़-फूक के चक्कर में न पड़ें और समय पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी स्नैक वेनम लगवाएं। सर्पदंश के मामलों में दो से तीन घंटे का गोल्डन आवर होता है। इसमें एंटी स्नैक वेनम लग जाने से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।




























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