पितृमोक्ष अमावस्या हिन्दूधर्म में मनाया जाने वाला पुण्यमयी पर्व है। पितृपक्ष में आने वाली अमावस्या को सर्व पितृमोक्ष अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में हमारे पूर्वज इस पृथ्वी पर आते हैं। सर्व पितृमोक्ष अमावस्या पितरों का इस धरती से विदाई लेने का दिन है। इस दिन सभी के पूर्वज इस भवसागर से पुन: मुक्त होकर परलोक की ओर चले जाते हैं।
सर्व पितृमोक्ष अमावस्या की तिथि और मुहूर्त
वर्ष 2025 में सर्व पितृमोक्ष अमावस्या का शुभ मुहूर्त 21 सितंबर 2025 को रात्रि 12 बजकर 16 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा और इसका समापन 22 सितंबर को दोपहर 01 बजकर 23 मिनट पर होगा।
आश्विन अमावस्या का महत्त्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया श्राद्ध परिवार के सभी पूर्वजों की आत्माओं को प्रसन्न करता है। इसलिए इस दिन सभी पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध करना चाहिए। इस दिन ज्ञात, अज्ञात सभी पितरों के श्राद्ध का विधान है। इसलिए जिन भी लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती; वो सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के पुण्यकारी अवसर पर अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं। इस दिन तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार के सभी लोगों को अपना आशीर्वाद देते हैं।




























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