जबलपुर। जि़ला मुख्यालय जबलपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर बसे तिलसानी गांव को मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन ने किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान खरीदी का केंद्र बनाया है, जबकि वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने यहां किसानों से खरीदे गए गेहूं-धान को सुरक्षित रखने के लिए कैंप, जहां चार साल पहले 2019 में किसानों से खरीदे गए 14 हज़ार क्विंटल गेहूं और 16 हज़ार क्विंटल धान को मैदान में पॉली बैग से कवर करके अस्थाई रूप से रखा गया था और जिसे अगले 3 से 6 महीने के भीतर कवर्ड गोदाम में शिफ्ट किया जाना था।
यहां रखे गेहूं और धान को सुरक्षित गोदाम में शिफ्ट करने के लिए कैंप के मैनेजर ने एक, दो बार नहीं, बल्कि 40 से ज़्यादा बार मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के जि़ला प्रबंधक को चि_ी भी लिखी। लेकिन, गेहूं और धान गोदाम में शिफ्ट होने के बजाय कैंप के मैदान में रखे-रखे सड़ गया। स्थिति यह है कि अब यहां रखी गेहूं और धान में कीड़े पड़ गए हैं। यह तिलसानी कैंप में गेहूं और धान के सडऩे के कारणों की पड़ताल में खुलासा हुआ है।
बताया जाता है कि तिलसानी कैंप में सड़े हुए गेहूं की कीमत लगभग एक करोड़ और धान की कीमत 1.25 करोड़ रुपए है। अधिकारियों के अनुसार, किसानों को उनके द्वारा बेचे गए गेहूं और धान की कीमत का भुगतान किया जा चुका है।




























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