बिलासपुर। ज़िले के बिजौर संकुल में पुस्तक, खेल सामग्री व अन्य सामान के फर्जी परिवहन की आड़ में भारी भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। बिहार में हुए चारा घोटाले की तर्ज पर इस मामले में भी पेश किए गए फर्जी बिलों में जिन वाहनों को पिकअप व आॅटो दशार्या गया है, उनके नंबरों की जांच में ये स्कूटी व बाइक पाए गए हैं। कुल 04 लाख 88 हज़ार रुपए की हेराफेरी में पूर्व प्राचार्य व संकुल समन्वयक का हाथ होने का आरोप है। पूरी जांच से और भी राज खुल सकते हैं और आंकड़ा भी बढ़ सकता है।
आरटीआइ के माध्यम से प्राप्त किए गए दस्तावेज इसकी पुष्टि कर रहे हैं। मामले में संकुल प्राचार्य हेमलता पांडेय और समन्वयक मनोज सिंह ठाकुर पर समग्र शिक्षा की अनुदान राशि में भ्रष्टाचार का आरोप है। दस्तावेजों से पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 के बीच 30 से अधिक फर्जी परिवहन बिल लगाकर 4.88 लाख से अधिक की राशि निकाली गई।




























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