नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने धोखा, दबाव व प्रलोभन से मतांतरण के आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता से सोमवार को कहा कि वह याचिका में अल्पसंख्यकों केखिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाएं। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप अर्जी करने वाली कुछ संस्थाओं की ओर से याचिका में ईसाइयों और मुसलमानों पर गंभीर आरोप लगाए जाने की शिकायत पर याचिकाकर्ता को ये निर्देश दिये।
गौरतलब है कि जस्टिस शाह की पीठ ने पिछली सुनवाइयों पर धोखा, दबाव व प्रलोभन से मतांतरण को गंभीर मुद्दा बताया था और केंद्र सरकार से इस बारे में कदम उठाने को कहा था। इतना ही नहीं पिछली सुनवाई पर जस्टिस शाह ने अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से मामले की सुनवाई में मदद करने का अनुरोध किया था, लेकिन अब मतांतरण से जुड़े सभी मामले प्रधान न्यायाधीश की पीठ में आ गए हैं।
सोमवार को मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि कुल कितनी याचिकाएं हैं जिनमें विभिन्न राज्यों के जबरन मतांतरण रोकने के लिए लाए गए कानूनों को चुनौती दी गई है और कितने मामले इससे संबंधित उच्च न्यायालयों में लंबित हैं?
संबंधित वकीलों ने कोर्ट को लंबित मामलों की जानकारी दी, जिस पर कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग ट्रांसफर याचिकाएं दाख़्िाल करने की बजाए एक ही मामले में सभी हाईकोर्ट के लंबित मामलों के ट्रांसफर की याचिका दाख़्िाल होनी चाहिए।




























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