भोपाल। राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों में संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम की ओर से की जा रही ‘शटडाउन’ और सीलिंग की कार्रवाई ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। नगर निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ छह विधानसभा क्षेत्रों के व्यापारी लामबंद हो गए हैं और उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल तथा ‘भोपाल बंद’ की चेतावनी दी है।
व्यापारियों के बढ़ते उग्र विरोध और आक्रोश को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार अब इस संकट के समाधान के लिए दिल्ली तक पहुंच गई है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवासमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि सरकार व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के दायरे में रहकर कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास कर रही है।
क्या है पूरा विवाद?
सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक निर्माण और बिना अनुमति के चल रहे शोरूम, होटल, जिम, रेस्टोरेंट और पब के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद करीब 8,500 से अधिक संपत्तियों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए गए हैं, जो कि शुरुआती आंकड़े से कहीं अधिक हैं। 15 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई से पहले बीएमसी को अपनी ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ पेश करनी है, जिसके कारण प्रशासनिक अमला लगातार सीलिंग करने में जुटा है।




























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