नई दिल्ली। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद भारत वैश्विक निर्यात के मोर्चे पर अधिक मज़बूत स्थिति में है। यह समझौता भारत को अपने 02 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य की ओर न सिर्फ तेजी से बढ़ने का अवसर देगा, बल्कि भारत की हिस्सेदारी को वैश्विक वैल्यू चेन में और गहराई से जोड़ेगा। इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत पहले से ही यूरोपीय आयात में अहम स्थान रखता है। इस समझौते के बाद यह हिस्सेदारी और बढ़ेगी।
भारत-ईयू एफटीए देश की आर्थिक कूटनीति में अहम मोड़ है। हाल में भारत ने कई देशों के साथ आधुनिक और संतुलित व्यापार समझौते किए हैं और यूरोपीय संघ के साथ यह करार उन सभी प्रयासों को मज़बूत ढांचे में जोड़ता है। दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सख्त मानकों वाले बाज़ार के साथ समझौता यह दिखाता है कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में अपनी जगह बना चुका है।





























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