नई दिल्ली। दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी से तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की तरफ अग्रसर भारत का केंद्रीय बैंक रुपये को पूर्ण परिवर्तनीय बनाने के एजेंडे को तय कर लिया है। असलियत में अगले दस वर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपये के लेन-देन को बढ़ावा देने व इसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार में ज़्यादा से ज़्यादा स्वीकार्य बनाने के लिए आरबीआई तैयारी कर चुका है।
मौद्रिक नीति की समीक्षा करने के साथ ही आरबीआई के गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने आरबीआई एट 100 इन ए मल्टी ईयर टाइम फे्रम नाम से अपना एजेंडा भी प्रकाशित किया है। हाल ही में अपनी स्थापना का 90वां साल मना चुके आरबीआई ने वर्ष 20&4 तक किन क्षेत्रों में मुख्य तौर पर काम करेगा, इसका ब्यौरा इसमें दिया गया है। इसमें रुपये को पूर्ण परिवर्तनीय बनाना एक प्रमुख पहलू होगा।
रुपये को पूर्ण परिवर्तनीय बनाने का मतलब है कि भारतीय रुपये को विदेश भेजने में या विदेशी मुद्राओं को देश में लाने में कोई रोक-टोक नहीं होगी। दूसरी मुद्राओं के सापेक्ष रुपये की कीमत बाज़ार के तत्व तय करेंगे। रुपये को मज़बूत करने या इसे कमज़ोर होने से बचाने के लिए सरकार की तरफ से कोई हस्तक्षेप नहीं होगा जैसा अभी किया जाता है।












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