नई दिल्ली। सुनील कुमार बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को एक बेहद महत्त्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चुनावी फंडिंग में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए पूर्व में रद्द किए जा चुके ‘चुनावी बॉन्ड’ के स्थान पर एक नया और फूलप्रूफ वैकल्पिक तंत्र तैयार करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों को 04 सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब और कार्ययोजना दाखिल करने का समय दिया है।
न्यायालय ने साफ किया कि लोकतंत्र में मतदाताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि राजनीतिक दलों को पैसा कहां से मिल रहा है? और नए विकल्प में यह सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य होगा कि इसके जरिए शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) और काले धन का प्रवेश राजनीति में न हो सके।
अगली सुनवाई सितंबर में: केंद्र सरकार के जवाब के बाद सितंबर के अंतिम सप्ताह में इस जनहित याचिका पर अगली बड़ी सुनवाई होगी।



























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