जबलपुर। मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में मात्र एक माह के भीतर बाघों के सिलसिलेवार मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। चालू वर्ष 2026 के जनवरी से अब तक 10 बाघों की मौत हो चुकी है।
बाघों की मौत होने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सज्ञान लेते हुए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर और वन विभाग के अधिकारियों को 25 फ़रवरी 2026 तक विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
याचिका में एडवोकेट आदित्य संघी ने कोर्ट को जानकारी दी कि 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ शुरू होने के बाद से अब तक किसी भी राज्य में एक साल में इतनी मौतें नहीं हुई हैं, जितनी 2025 और अब 2026 की शुरुआत में मध्यप्रदेश में हुई हैं। जनवरी-फरवरी 2026 में अब तक 10 बाघों की मौत हो चुकी है और इसकी मुख्य वजह शहडोल और बांधवगढ़ के आसपास खेतों में बिछाए गए बिजली के तार हैं और इसमें संगठित गिरोह, अंतरराष्ट्रीय शिकारी सक्रिय हैं, जबकि वन विभाग इतने बड़े मामले को आपसी लड़ाई बताकर दबाने की कोशिश कर रहा है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को नोटिस जारी कर कहा है कि दो सप्ताह के भीतर जवाब दिया जाए




























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