प्री-मानसून के समय हवा में नमी (Moisture) इतनी ज्यादा होती है कि शरीर का पसीना सूखता नहीं है, बल्कि चिपचिपा होकर त्वचा पर ही जमा रहता है। यह चिपचिपा पसीना और उमस मिलकर बैक्टीरिया और ‘फंगस’ के पनपने के लिए दुनिया की सबसे आदर्श जगह बनाते हैं।
यही कारण है कि इस मौसम में जांघों के बीच, पंजों में और अंडरआर्म्स में भयंकर दाद (Ringworm), खुजली और रैशेज होने लगते हैं। यदि बारिश शुरू होने से पहले त्वचा की सही सफाई न की जाए, तो पूरे मानसून में त्वचा के रोग पीछा नहीं छोड़ते।
साबुन का झाग छोड़ें, ‘सूखा उबटन’ अपनाएं
केमिकल वाले साबुन त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नष्ट कर देते हैं, जिससे फंगस और तेजी से फैलता है। इस मौसम में त्वचा को नमी (Moisture) की नहीं, बल्कि रूखेपन (Dryness) और ‘एंटी-बैक्टीरियल’ तत्वों की जरूरत होती है।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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