नई दिल्ली। आधुनिक समाज में जहां महिलाएं हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, वहीं दहेज जैसी कुप्रथा आज भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विचारकों ने अपील की है कि माता-पिता अपनी बेटियों को शादी में भारी-भरकम दहेज देने के बजाय उन्हें उच्च शिक्षा, आत्मसम्मान और जीवन भर का अटूट समर्थन दें। यही उनके सुरक्षित और स्वावलंबी भविष्य की असली गारंटी है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज को अब शादियों के भव्य दिखावे और लेन-देन से ऊपर उठना होगा। माता-पिता को अपनी बेटियों को यह भरोसा दिलाना होगा कि वे किसी भी परिस्थिति में अकेली नहीं हैं। जब समाज बेटियों की शादी पर खर्च होने वाले धन को उनकी शिक्षा और कौशल विकास में निवेश करेगा, तभी एक सशक्त और संवेदनशील राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।




























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