गर्मियों की रातों में अक्सर ऐसा होता है कि शरीर थका हुआ होता है, लेकिन जैसे ही हम बिस्तर पर लेटते हैं, दिमाग में विचारों की आंधी चलने लगती है और नींद कोसों दूर भाग जाती है। आयुर्वेद इसे ‘मज्जा धातु’ (Nervous System) में पित्त (गर्मी) का प्रवेश मानता है। जब दिमाग का तापमान बढ़ा होता है, तो पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) से ‘मेलाटोनिन’ (नींद का हार्मोन) का स्राव ठीक से नहीं हो पाता।
इस मानसिक गर्मी को बुझाने का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत ‘चंद्रमा’ है।
चंद्र त्राटक का अद्भुत लाभ
जिस तरह सूर्य की किरणें शरीर में अग्नि (विटामिन-D और ऊर्जा) पैदा करती हैं, उसी तरह चंद्रमा की किरणें शरीर में ‘अमृत’ (शीतलता और शांति) का संचार करती हैं।
गर्मियों की रात में सोने से पहले 10 मिनट तक खुले आसमान के नीचे बैठकर चंद्रमा को निहारना (चंद्र त्राटक) मस्तिष्क की उत्तेजित नसों को तुरंत रिलैक्स कर देता है। यह आंखों के रास्ते दिमाग की सारी गर्मी को सोख लेता है और एक गहरी, स्वप्नहीन नींद की नींव रखता है।
मेरी राय में
कृत्रिम ठंडक (AC) आपके शरीर को सुन्न कर सकती है, लेकिन आपके मन को शांत नहीं कर सकती। चंद्रमा की इस कोमल और शीतल ऊर्जा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। जब मस्तिष्क शांत होगा, तो आपकी ‘जीवनी शक्ति’ भी एक नई एकाग्रता के साथ जागेगी।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
चांदनी रात का ‘औषधीय जल’: एक चांदी या कांच के बर्तन में साफ पीने का पानी भरें और उसे रात भर चंद्रमा की रोशनी (चांदनी) में छत या बालकनी पर रख दें। सुबह उठकर खाली पेट इस ‘चंद्र-जल’ को पिएं। चंद्रमा की शीतल ऊर्जा से चार्ज हुआ यह पानी गर्मियों में मानसिक तनाव, डिप्रेशन, और माइग्रेन (आधे सिर का दर्द) को जड़ से खत्म करने की सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक दवा है।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी




























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