कोटा। सर्दियों का मौसम आते ही शहर की नर्सरियों में रौनक लौट आई है। पिछले पन्द्रह दिनों से मौसमी फूलों की बिक्री में लगातार तेजी देखी जा रही है। इस समय सबसे ज़्यादा मांग अफ्रीकन गेंदा, फ्रेंच गेंदा, गुलदावरी, पिटोनिया और डेंथेस जैसे पौधों की बनी हुई है। नर्सरी संचालकों के अनुसार, ठंड में पौधों की ग्रोथ भले ही सामान्य दिनों की तुलना में धीमी रहती है, लेकिन सही देखभाल और पौष्टिक खाद के उपयोग से इन्हें पूरे मौसम हरा-भरा रखा जा सकता है.
सर्दियों में सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त धूप की कमी होती है। ठंड के दिनों में सूरज की रोशनी कमजोर पड़ जाती है और मिट्टी ठंडी हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पौधों को रोजाना कम से कम 4-6 घंटे सुबह की हल्की धूप ज़रूर मिले। जहाँं ज़्यादा धूप नहीं आती, वहां पौधों को ऐसे स्थान पर शिफ्ट करना चाहिए, जहां सुबह की किरणें थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन सीधे पहुंचती हों। क्योंकि, धूप न मिलने पर पौधों के फूल आने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
कोटा के नर्सरियों में इस समय वर्मीकम्पोस्ट, नीम खली, सरसों खली का पानी, नीम आयल और हल्के जैविक पोषक तत्त्वों का उपयोग किया जा रहा है। पौधों की रखवाली करने वाले मालियों का कहना है कि डीएपी के 10-15 दाने एक पौधे में डालने से फूल आने की क्षमता काफी बढ़ जाती है, वहीं गमले को ज़मीन पर सीधे न रखकर ईंट या लकड़ी के स्टैंड पर रखने से मिट्टी जल्दी ठंडी नहीं होती और जड़ों का विकास बेहतर होता है।





























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