Homeधर्म अध्यात्मज्योतिष और ज्ञान के आदि प्रणेता हैं महर्षि भृगु

ज्योतिष और ज्ञान के आदि प्रणेता हैं महर्षि भृगु

 ब्रह्मा के मानस पुत्र के रूप में जन्मे महर्षि भृगु ने न केवल धर्म और अध्यात्म, बल्कि खगोल विज्ञान और भविष्य विज्ञान (ज्योतिष) को भी नई दिशा प्रदान की।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि भृगु की उत्पत्ति ब्रह्मा के हृदय या त्वचा से हुई थी। वे सप्तर्षि मंडल के महत्त्वपूर्ण सदस्य हैं। उनका विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री ख्याति से हुआ था, जिनसे उन्हें दो पुत्र, धाता और विधाता, तथा एक पुत्री श्रीलक्ष्मी प्राप्त हुईं। माता लक्ष्मी का विवाह भगवान् विष्णु से हुआ, जिसके कारण महर्षि भृगु भगवान् विष्णु के ससुर भी कहलाते हैं।

ज्योतिष के जनक

महर्षि भृगु को ‘ज्योतिष का जनक’ माना जाता है। उन्होंने ‘भृगु संहिता’ जैसे महान ग्रंथ की रचना की, जिसे विश्व का सबसे पुराना ज्योतिष ग्रंथ माना जाता है। इस ग्रंथ के माध्यम से उन्होंने भूत, भविष्य और वर्तमान की गणना की ऐसी सूक्ष्म तकनीक विकसित की, जो आज भी ज्योतिषियों के लिए मार्गदर्शक है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ‘संजीवनी विद्या’ की भी खोज की थी, जिससे मृत प्राणी को पुनर्जीवित किया जा सकता था।

ज्ञान की खोज की प्रेरणा

महर्षि भृगु का जीवन हमें धैर्य, संयम और ज्ञान की खोज की प्रेरणा देता है। उनकी जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस महान विरासत को याद करने का दिन है, जिसने मानवता को समय और भाग्य के रहस्यों को समझने की दृष्टि प्रदान की। आज भी उनके द्वारा बताए गए आध्यात्मिक और नैतिक मार्ग प्रासंगिक हैं।

संबंधित खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

आगामी कार्यक्रमspot_img

Popular News