मई की झुलसाने वाली गर्मी और ‘लू’ के थपेड़े केवल हमारी त्वचा को ही नहीं जलाते, बल्कि यह शरीर के भीतर के रक्त को भी उबलने पर मजबूर कर देते हैं। इस मौसम में ‘पित्त’ (गर्मी) भड़कने से न केवल शरीर पर दाने और घमौरियां निकलती हैं, बल्कि मन में अकारण क्रोध, चिड़चिड़ापन और तनाव भी बढ़ने लगता है। बाजार के केमिकल युक्त सनस्क्रीन और पाउडर त्वचा को कुछ पल का भ्रम तो दे सकते हैं, लेकिन शरीर के भीतर और मस्तिष्क में घुसी इस भयंकर गर्मी को खींचने का जो ‘दिव्य अस्त्र’ आयुर्वेद ने हमें दिया है, वह है—शुद्ध ‘श्वेत चंदन’।
यह कैसे काम करता है?
आयुर्वेद में चंदन को अत्यंत ‘शीत वीर्य’ (Cooling in nature) और ‘पित्त शामक’ माना गया है। जब शुद्ध चंदन को पानी या गुलाब जल के साथ घिसकर माथे (आज्ञा चक्र), नाभि, या त्वचा पर लगाया जाता है, तो इसकी तासीर रक्त की भयंकर गर्मी को चुंबक की तरह बाहर खींच लेती है। केवल इसका स्पर्श ही नहीं, बल्कि चंदन की प्राकृतिक, सौंधी और सात्विक सुगंध हमारी ‘ऑलफैक्ट्री नर्व्स’ (Olfactory nerves) के जरिए सीधे मस्तिष्क तक पहुंचती है और नर्वस सिस्टम को तुरंत रिलैक्स कर देती है। यह वाष्पीकरण (Evaporation) के विज्ञान के साथ-साथ ‘अरोमाथेरेपी’ (Aromatherapy) का सबसे उत्कृष्ट और प्राचीन रूप है।
मानसिक ताप, क्रोध और झुलसी त्वचा (Sunburn) का अचूक इलाज
गर्मी के दिनों में जब धूप से लौटकर सिर फटने लगता है या अत्यधिक काम के दबाव में क्रोध और ‘मानसिक पित्त’ (Mental Heat) बढ़ जाता है, तब चंदन का लेप एक चमत्कारी ‘कूलिंग पैड’ का काम करता है। यह माथे की सिकुड़ी हुई नसों को खोलता है और अनिद्रा (Sleeplessness) को दूर कर गहरी नींद लाता है। इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण धूप से झुलसी हुई त्वचा (Sunburn), मुहांसों और लाल घमौरियों को रातों-रात शांत कर देते हैं।
उपयोग की सरल और प्रामाणिक विधि
•बाजार में मिलने वाले रेडीमेड चंदन पाउडर से बचें। हमेशा ‘शुद्ध श्वेत चंदन की लकड़ी’ और एक चंदन घिसने वाला पत्थर (पाटा) घर में रखें।
•पत्थर पर कुछ बूंदें शुद्ध जल या गुलाब जल की डालें और लकड़ी को गोल-गोल घुमाते हुए घिसें।
•जब एक गाढ़ा लेप तैयार हो जाए, तो इसे उंगलियों की मदद से अपने माथे (भौहों के बीच), गर्दन के पिछले हिस्से और छाती (हृदय के पास) पर लगाएं।
•त्वचा रोगों के लिए, इस लेप को प्रभावित जगह पर लगाएं। इसे 15-20 मिनट तक सूखने दें और फिर ठंडे या सादे पानी से धो लें।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
भयंकर सिरदर्द और नकसीर (Nosebleed) में लाभ: यदि भयंकर ‘लू’ लगने के कारण सिरदर्द बर्दाश्त के बाहर हो रहा हो, या अत्यधिक गर्मी से नाक से खून (नकसीर) फूट पड़ा हो, तो तुरंत ताजे घिसे हुए चंदन के लेप में ‘एक चुटकी शुद्ध देसी कपूर’ (भीमसेनी कपूर) मिला लें। इस अत्यंत ठंडे लेप को माथे और सिर के बीचो-बीच (ब्रह्मरंध्र) पर गाढ़ा-गाढ़ा लगा दें। यह शरीर के ‘थर्मोस्टेट’ को तुरंत रीसेट कर देगा, नाक से खून आना बंद हो जाएगा और सिरदर्द ऐसे गायब होगा जैसे कभी था ही नहीं।
• भ्रांति (Myth): बाजार में मिलने वाले सस्ते ‘चंदन पाउडर’ या ‘सैंडलवुड क्रीम’ से भी वही प्राकृतिक ठंडक मिलती है, इसलिए लकड़ी घिसने की मेहनत क्यों की जाए?
• सच (Fact): बाजार में बिकने वाले 90% चंदन पाउडर में मुल्तानी मिट्टी या सस्ता बुरादा मिला होता है और उसकी खुशबू के लिए ‘सिंथेटिक परफ्यूम’ (केमिकल) का प्रयोग किया जाता है। केमिकल युक्त परफ्यूम त्वचा और मस्तिष्क में ठंडक नहीं, बल्कि छिपी हुई ‘गर्मी’ पैदा करते हैं। असली आयुर्वेदिक और चिकित्सीय लाभ केवल और केवल शुद्ध चंदन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर निकाले गए ताजे लेप से ही प्राप्त होता है।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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