दुनिया के जंगल मानवीय गतिविधियों से बढ़ती अस्थिरता के कारण कार्बन अवशोषित करने की क्षमता खो रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, जंगलों और अन्य प्राकृतिक वास जो अपने पेड़, पौधों व मिट्टी में कार्बन जमा करते हैं, उनकी स्थिति में गंभीर बदलाव होने की आशंका है। धरती के कई अतिसंवेदनशील स्थानों पर उच्च तापमान, जंगलों की कटाई और खेती के अल्पकालिक प्रभाव का अर्थ है कि लंबी समयावधि में वहां कार्बन भंडारों की स्थिति ठीक होने की संभावना कम है।
शोधकतार्ओं ने पाया कि 1981 से 2018 तक दुनियाभर के पारिस्थितिक तंत्र विभिन्न चरणों से गुजरे। इन चरणों में पौधों की ज़्यादा और कम कार्बन अवशोषित करने की क्षमता शामिल है। इस तरह उतार-चढ़ाव का स्तर अस्थिरता का बड़ा जोखिम पैदा करता है। उदाहरण के लिए अत्यधिक शुष्क व गर्म वातावरण ने कैलिफोर्निया में जंगल की आग संबंधी घटनाएं बढ़ा दी हैं। अधिक आग का मतलब है कि जंगल कभी-कभी स्थायी रूप से झाड़ियों में बदल जाता है, जिससे भूमि की वातावरण से कार्बन सोखने की क्षमता घटती है।





























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