लखनऊ। उत्तरप्रदेश सरकार ने राज्य के लाखों बुजुर्गों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन योजना के नियमों में एक महत्त्वपूर्ण संशोधन किया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निदेर्शों के अनुसार, अब पेंशन आवेदन के दौरान आयु सत्यापन के लिए केवल आधार कार्ड पर दर्ज जन्मतिथि को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाएगा। अपात्रों को रोकने और पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के उद्देश्य से सरकार ने यह कदम उठाया है।
शासन स्तर से सभी जिलों के जिला समाज कल्याण अधिकारियों को भेजे गए आदेश के मुताबिक, अब आवेदक की उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है, इसकी पुष्टि के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाएगी–
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए: परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति, शैक्षिक प्रमाण पत्र या हाईस्कूल की मार्कशीट।
शहरी क्षेत्रों के लिए: अब शहरी बुजुर्ग वोटर आईडी (मतदाता पहचान पत्र), पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या राशन कार्ड के माध्यम से भी अपनी उम्र साबित कर सकेंगे। इसके साथ ही आवेदकों को एक स्वघोषणा पत्र देना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके पास हाईस्कूल की मार्कशीट या परिवार रजिस्टर का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
योजना की पात्रता: उत्तरप्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना आय रु. 46,080 और शहरी क्षेत्रों में रु. 56,460 से अधिक नहीं होनी चाहिए। वर्तमान में पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से पेंशन राशि सीधे भेजी जा रही है।




























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