संकल्प शक्ति। पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम में हरियाली अमावस्या के पावन पर्व पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित शिष्यों-भक्तों को संबोधित करते हुए सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने कहा कि ‘‘वृक्ष केवल धरती का शृृंंगार नहीं हैं, बल्कि वे समस्त मानवजाति के प्राणों के रक्षक हैं। प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए, मानवता के लिए राष्ट्र के लिए प्रत्येक मनुष्य को प्रतिवर्ष कम-से-कम एक वृक्ष लगाकर उसका संरक्षण अवश्य करना चाहिए। सिद्धाश्रम धाम में हर वर्ष हज़ारों की संख्या में फलदार और औषधीय वृक्ष लगाए जाते हैं, जिससे यहाँ का वातावरण स्वच्छ रहे, लोगों को शुद्ध आॅक्सीजन मिले और उन्हें निरोगी काया प्राप्त हो।’’
परम पूज्य गुरुवरश्री ने कहा कि ‘‘इसी तरह आगामी माह में 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या के विशेष अवसर पर यहाँ पुन: एक वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न किया जाएगा। इस विशाल अभियान में सिद्धाश्रम धाम के समस्त वासियों की सक्रिय सहभागिता रहेगी। महाराज श्री ने देशवासियों का आह्वान किया कि स्वयं को स्वस्थ व ऊर्जावान बनाए रखने तथा पर्यावरण संकट से निपटने के लिए , जिसके पास भूमि है, वे वृक्षारोपण जैसी महत्त्वपूर्ण ज़िम्मेदारी का निर्वहन अवश्य करें और जिनके पास निजी भूमि नहीं है, वे खाली पड़ी शासकीय भूमि पर वृक्ष लगा सकते हैं। हम सभी को पूरी निष्ठा के साथ इस पुनीत कार्य में अपना योगदान देना चाहिए।
सिद्धाश्रम सरिता के किनारे…
हलहारिणी अमावस्या प्रकृति, कृषि और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता ज्ञपित करने का पावन पर्व है। इस हरीतिमा पर्व पर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के पावन सान्निध्य और पूजनीया शक्तिमयी माता जी की गरिमामयी उपस्थिति में शक्तिस्वरूपा बहन पूजा शुक्ला जी, सिद्धाश्रम चेतना आरूणी जी, सिद्धाश्रमरत्न अजय अवस्थी जी सहित, सिद्धाश्रमवासी शिष्यों-भक्तों के द्वारा आश्रम परिक्षेत्र अन्तर्गत दानबीर पहाड़ी के पीछे, सिद्धाश्रम सरिता के किनारे एक वृहद् वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न किया गया। इस अभियान के तहत सिद्धाश्रम परिक्षेत्र को हरा-भरा और औषधीय गुणों से समृद्ध बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के फलदार और औषधीय पौधे रोपे गए।
सनातन संस्कृति के महापर्व पर…
पूर्व के वर्षोंकी भांति इस वर्ष भी सनातन संस्कृति के इस महापर्व पर दिनांक 14 जुलाई 2026 को सिद्धाश्रम परिक्षेत्र नित्य से कहीं अधिक आध्यात्मिक और व्यावहारिक ऊर्जा से ओतप्रोत था। वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ स्वयं परम पूज्य सद्गुुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज और पूजनीया शक्तिमयी माता जी के करकमलों से हुआ। पूजनीया माता जी ने पौधों को वात्सल्य भाव से सींचते हुए पर्यावरण की रक्षा में मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित किया।
फलदार और औषधीय पौधों का रोपण
आश्रम के विशाल भूभाग में पारिस्थितिक संतुलन को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत सोच-समझकर पौधों का चयन किया गया था। इस अभियान के तहत मुख्य रूप से दो श्रेणियों के पौधे लगाए गए–
फलदार पौधे: आम, अमरूद, आंवला, कटहल, चीकू, गूलर, करौंदा, इमली और नींबू जैसे पौधों का रोपण किया गया, जो भविष्य में पक्षियों के लिए आश्रय और सिद्धाश्रमवासियों के लिए प्राकृतिक संपदा बनेंगे।
औषधीय पौधे: नीम, तुलसी, गिलोय, हरड़, बहेड़ा, पीपल, बरगद जैसे अत्यंत दुर्लभ व गुणकारी पौधे भी लगाए गए, ताकि आश्रम परिसर में सदैव आरोग्यता प्रदान करने वाली प्राणवायु प्रवाहित होती रहे।
यह वृक्षारोपण अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे की सुरक्षा और उसकी देखरेख का संकल्प भी परम पूज्य गुरुवरश्री के शिष्यों-भक्तों के द्वारा लिया गया। सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ यह कार्य संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।





























Views Today : 225
Views Last 7 days : 881
Views Last 30 days : 1531
Views This Year : 10521
Total views : 110994
Who's Online : 0
Your IP Address : 162.251.85.8