भोपाल। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) भोपाल के विज्ञानियों ने बेहद ज़हरीली मस्टर्ड गैस को निष्क्रिय करने की अधिक कारगर स्वदेशी विधि विकसित की है। इसके लिए विज्ञानियों ने लंबे शोध के बाद नैनो पदार्थ (पाउडर) तैयार किया है, जो सीधे सूर्य के प्रकाश से प्रतिक्रिया कर मस्टर्ड गैस को निष्क्रिय करने के साथ ही इसे हानिरहित रसायन में बदल देता है।
विश्व में अब तक खतरनाक गैसों को निष्क्रिय करने के लिए विकसित किए गए नैनो कंपोजिट पदार्थ सूर्य की पराबैंगनी किरणों (यूवी रेज) के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, लेकिन यह नया पदार्थ सूर्य के प्रकाश में मौज़ूद सभी तत्त्वों से प्रतिक्रिया करता है।
प्रयोगशाला से बाहर खुले वातावरण में तेजी से काम करने की इसकी विशेष क्षमता के कारण इस शोध विज्ञानियों की दुनिया में सराहा जा रहा है। शोध को अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका एजवेंटे केमी में प्रकाशित किया गया है।
यूं काम करता है पदार्थ
शोध टीम के नेतृत्वकर्ता आइसर के रसायनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर अभिजीत पात्रा बताते हैं कि अभी तक के नैनो कंपोजिट पदार्थ यूवी किरणों के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं, लेकिन इसकी एक कमी यह है कि सूर्य के प्रकाश में यूवी किरणों की हिस्सेदारी सीमित होती है।
इसके विपरीत आइसर में विकसित किया गया नया पदार्थ वास्तव में फोटोकैटेलिस्ट है, जो धूप में मौज़ूद यूवी, विजुअल और नियर इन्फ्रारेड प्रकाश किरणों के साथ भी प्रतिक्रिया करने में सक्षम है। ऐसे में इस नए पदार्थ का उपयोग खुले वातावरण में सूर्य के प्रकाश के साथ किया जा सकता है जिससे यह खतरनाक गैस को बेअसर करने में अधिक कारगर साबित होगा।





























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