सीधी। जनकल्याण की दृष्टि से भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में देशस्तर पर दिव्य अनुष्ठान कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में, दिनांक 30-31 अगस्त को साड़ा भवन, तहसील-बहरी, ज़िला-सीधी, मध्यप्रदेश में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ मनोरम वातावरण मेें सम्पन्न किया गया।
समापन अवसर पर उपस्थित भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप भइया’ जी ने अपनी चिरपरिचित मधुर शैली में कहा कि ‘‘भाइयों-बहनों, धर्म-अध्यात्म एक मार्ग है और पूजा-पाठ, त्याग-अनुष्ठान एक पद्धति है। जिस प्रकार औषधियों के माध्यम से हम अपनी काया को निरोगी बनाते हैं, उसी प्रकार पूजा-पाठ करने से, विकारों का त्याग करने से और दिव्यअनुष्ठान के माध्यम से हमारा जीवन सुख-शान्ति से परिपूर्ण रहता है और हम सतोगुणी मार्ग पर चलते हुए, इसी पथ पर समाज को आगे बढ़ा सकते हैं, तो श्रीदुर्गाचासलीसा पाठ के माध्यम से समाज में शक्ति और चेतना का संचार किया जा रहा है और इसी के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन आएगा। यदि किसी के जीवन में शान्ति नहीं है, बेचैनी है, विषमताएं चारोंओर से घेरे हुए हैं, तो समझिए कि देवी-देवताओं का आशीर्वाद उसके ऊपर नहीं है। आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपको धर्म-अध्यात्म के पथ पर चलना ही पड़ेगा।
यहाँ सम्पन्न यह दिव्य अनुष्ठान, निश्चय ही आप सभी के स्वर्णिम सौभाग्य के उदय का द्योतक है। लेकिन, प्राप्त इस सौभाग्य का लाभ आप तभी प्राप्त कर पाएंगे, जब नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन धारण करके अपने कार्य-व्यवहार में सात्विकता बनाए रखेंगे। नित्यप्रति प्रात: उठने के साथ ही यह निश्चय करें कि मैं किसी के प्रति द्वेषभाव नहीं रखूंगा और स्वभाव को मधुर रखूंगा। कोई भी समस्या सामने आने पर विचलित नहीं होऊंगा और उस समस्या को निवेदनार्थ ‘माँ’-गुरुवर की दिव्यछवि के समक्ष रखकर धीरे-धीरे सुलझाने का प्रयास करूंगा। ये विचार ही आपको निश्चिंतता व निर्भयता प्रदान कर सकते हैं।
सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज हम सभी को मानवीय गुणों से ओतप्रोत कर देना चाहते हैं। उनकी व्याकुलता, जो कि मानवता की सेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा के लिये भगवती मानव कल्याण संगठन, पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम और भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के नाम से त्रिधाराओं के रूप में प्रकट हुई है, उनकी विचारधाराओं के अनुरूप कर्त्तव्यकर्म करते हुए अपनी सद्प्रवृत्तियों के आलोक से परिवार, समाज और देश को प्रकाशित करें।’’
उद्बोधनक्रम के पश्चात् उपस्थित जनसमुदाय ने शक्तिजल और प्रसाद ग्रहण किया तथा शुभविचारों से युक्त मन के साथ सभी अपने गन्तव्य की ओर प्रस्थित हुए।




























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