जून के महीने में हवा में नमी (Moisture) बढ़ जाती है, और यही वह समय है जब हवा के जरिए फैलने वाले (Airborne) वायरस और फंगस सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं। आधुनिक विज्ञान इसे ‘बैक्टीरियल ग्रोथ’ का समय कहता है। हमारे पूर्वजों ने इस मौसम में बीमारियों को घर में घुसने से रोकने के लिए एक बहुत ही वैज्ञानिक प्रक्रिया बनाई थी, जिसे आयुर्वेद में ‘धूपन कर्म’ (Fumigation) कहा जाता है। यह हवा को रसायनों (Room Fresheners) से नहीं, बल्कि औषधीय धुएं से शुद्ध करने की कला है।
धूपन कर्म क्या है और कैसे काम करता है?
आधुनिक रूम फ्रेशनर केवल बदबू को रसायनों की तेज खुशबू से दबाते हैं, वे हवा के कीटाणुओं को नहीं मारते। इसके विपरीत, जब प्राकृतिक जड़ी-बूटियों (जैसे नीम, गिलोय, लोबान, और गाय का सूखा गोबर) को जलाकर उनका धुआं पूरे घर में घुमाया जाता है, तो उस धुएं में गजब की ‘एंटी-माइक्रोबियल’ (कीटाणुनाशक) शक्ति होती है।
•यह औषधीय धुआं घर के कोनों में छिपे मच्छरों, सीलन (फंगस) और हवा में तैरने वाले वायरल कीटाणुओं को कुछ ही मिनटों में नष्ट कर देता है।
मेरी राय में: बीमारियों का इलाज अस्पताल जाने में नहीं, बल्कि उन्हें अपने घर की चौखट पर ही रोक देने में है। इस प्री-मानसून में ‘धूपन कर्म’ की इस प्राचीन और अत्यंत वैज्ञानिक परंपरा को पुनः जीवित करें। जब आपके घर का वातावरण सकारात्मक और शुद्ध होगा, तो आपके परिवार की ‘संकल्प शक्ति’ कभी अस्वस्थ नहीं होगी।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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