कोलकाता/उत्तर 24 परगना। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही अवैध घुसपैठ के खिलाफ अभियान जारी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा, रोजगार और जनसंख्या संतुलन को ध्यान में रखते हुए अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों में बनाए गए विशेष केंद्रों से अब तक 4,800 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस उनके देश डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि सैकड़ों अन्य अभी भी वापसी की कतार में हैं।
सघन जांच अभियान: राज्य के गृह विभाग के निर्देश पर पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों के लिए विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ (हिरासत केंद्र) बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। इन केंद्रों को अस्थायी ट्रांजिट सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासनिक रिकॉर्ड, निवास प्रमाणपत्र, राशन कार्ड और अन्य सरकारी अभिलेखों के व्यापक सत्यापन के दौरान जिन लोगों के दस्तावेज फर्जी पाए जा रहे हैं या जो नागरिकता साबित करने में नाकाम हो रहे हैं, उन्हें हिरासत में लेकर इन होल्डिंग सेंटर्स में भेजा जा रहा है।
उत्तर 24 परगना के स्वरूपनगर स्थित हकीमपुर चेक पोस्ट और अन्य भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर ऐसे सैकड़ों अवैध प्रवासियों की रोजाना भारी भीड़ देखी जा रही है, जो पकड़े जाने के डर से खुद ही अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर वापस बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को फेंसिंग (बाड़ लगाने) के लिए करीब 100 किलोमीटर लंबी जमीन का हिस्सा सौंप दिया है, जिसमें उत्तर बंगाल का रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ‘चिकन नेक’ (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) क्षेत्र शामिल है। सरकार का दावा है कि राज्य को पूरी तरह घुसपैठ मुक्त बनाने तक यह अभियान बिना रुके जारी रहेगा।




























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