जैसे ही मौसम में उमस (Humidity) बढ़ती है, हमारे शरीर का पाचन तंत्र सुस्त पड़ने लगता है। जो खाना सर्दियों में आसानी से पच जाता था, वही खाना अब पेट में भारीपन, गैस और आलस पैदा करता है। प्राकृतिक चिकित्सा का सबसे पहला नियम है कि मौसम के अनुसार अपने आहार को हल्का कर दें। और जब हल्के आहार की बात आती है, तो प्रकृति की सबसे अनमोल देन है— ‘लौकी’। यह केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि उमस भरे मौसम में पेट और हृदय को बचाने वाली अचूक औषधि है।
पाचन तंत्र को आराम और हाइड्रेशन
लौकी में 92 प्रतिशत से अधिक शुद्ध और क्षारीय (Alkaline) पानी होता है। उमस के कारण जब हमारे शरीर से पसीना निकलता है, तो बहुत से खनिज (Minerals) नष्ट हो जाते हैं। लौकी उस पानी और खनिजों की तुरंत भरपाई करती है। इसके रेषे (Fiber) इतने मुलायम होते हैं कि हमारी आंतों को इसे पचाने के लिए बिल्कुल भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। यह पेट की पुरानी से पुरानी कब्ज को प्राकृतिक रूप से धोकर बाहर कर देती है।
हृदय और ब्लड प्रेशर के लिए अमृत
प्री-मानसून की गर्मी में अक्सर घबराहट और ब्लड प्रेशर (BP) बढ़ने की शिकायत होती है। लौकी का सेवन रक्त की नलियों की सूजन को कम करता है और कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से घटाता है।
मेरी राय में: बदलते मौसम में अपने शरीर की आवाज को सुनें। जब पेट भारीपन महसूस करे, तो उसे लौकी जैसा सुपाच्य और सात्विक आहार दें। आपका पेट जितना हल्का और साफ रहेगा, आपकी ‘जीवनी शक्ति’ और कार्यक्षमता उतनी ही तेज होगी।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
लौकी का सूप (रात का उत्तम आहार): उमस भरे दिनों में रात को रोटी या चावल खाने के बजाय, लौकी का सूप पिएं। एक छोटी लौकी को उबालकर मिक्सी में पीस लें। उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक, पिसी हुई काली मिर्च और ताजा हरा धनिया मिलाएं। यह सूप पेट को इतनी शांति और ठंडक देगा कि आपको रात में बहुत गहरी और बिना रुकावट वाली नींद आएगी।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
www.bschauhan09.blogspot.com, www.facebook.com/bschauhan09





























Views Today : 224
Views Last 7 days : 880
Views Last 30 days : 1530
Views This Year : 10520
Total views : 110993
Who's Online : 0
Your IP Address : 162.251.85.8