भोपाल। मध्यप्रदेश में त्यौहारों के सीजन से ठीक पहले शुद्धता का दावा करने वाली घी कंपनियों का एक बड़ा और चौंकाने वाला गोरखधंधा उजागर हुआ है। राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे विशेष खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत प्रदेश भर से लिए गए घी के नमूनों की जांच में 16 बड़े ब्रांड्स के घी पूरी तरह असुरक्षित, अमानक और नकली पाए गए हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन ब्रांड्स में शुद्ध दूध के फैट की जगह धड़ल्ले से पॉम आॅयल, वनस्पति और अन्य केमिकल्स की मिलावट की जा रही थी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इन सभी 16 ब्रांड्स को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करते हुए बाज़ार से इनका स्टॉक ज़ब्त करना शुरू कर दिया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, मिलावटखोरों का एक बड़ा नेटवर्क असली और नामी कंपनियों जैसे अमूल, मधुसूदन और मदर डेयरी के नकली रैपर व डिब्बे छपवाकर भी बाज़ारों में खपा रहा था, जिसे पुलिस ने अलग-अलग रेड में पकड़ा है।
मध्य प्रदेश सरकार ने खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए 20 जुलाई 2026 से राज्यव्यापी विशेष अभियान की शुरूआत की थी। इस अभियान के तहत प्रदेश भर से 2500 से अधिक घी, मावा और पनीर के नमूने एकत्र कर भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजे गए थे। अब तक आई शुरूआती रिपोर्ट में ही 16 ब्रांड्स के घी मानकों पर पूरी तरह फेल हो गए। विभाग अब निर्माता (मैन्युफैक्चरर) से लेकर रिटेलर तक की पूरी सप्लाई चेन को खंगाल रहा है, ताकि इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
पाया गया खतरनाक ‘सीसा’ (लेड): जांच अधिकारियों के मुताबिक, कुछ नामी ब्रांड्स के घी में पॉम आॅयल के साथ-साथ खतरनाक स्तर पर सीसा और भारी धातुएं पाई गई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा मिलावटी घी खाने से लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पूरी तरह खराब हो सकता है, साथ ही शरीर के नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पर भी इसका बेहद बुरा असर पड़ता है।
प्रशासन की चेतावनी: मिलावटखोरों के खिलाफ रासुका और सख्त आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। आम जनता की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।



























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