लखनऊ। बांग्लादेशियों व रोहिंग्या की गहरे षड्यंत्र के तहत घुसपैठ करा रहे सिंडीकेट को बीते तीन वर्षां में 20 करोड़ रुपये की फंडिंग की गई है। एटीएस अब इससे पूर्व हुई विदेशी फंडिंग की छानबीन करने के साथ ही कई बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही है। सूत्रों का कहना है कि खाड़ी देशों से भी फंडिंग की जा रही थी।
एटीएस के निशाने पर दिल्ली व बंगाल के पतों पर संचालित कई एनजीओ भी हैं, जिनके माध्यम से विदेश से फंडिंग की जा रही थी। सिंडीकेट के पीछे आतंकी संगठनों की भी भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता। एटीएस ऐसे कई बिंदुओं पर पकड़े गए आरोपित बांग्लादेश के निवासी आदिल मुहम्मद अशरफी उर्फ आदिलुर्रहमान, देवबंद (सहारनपुर) निवासी शेख नबीबुल हक व अबु हुरैरा गाजी से नए सिरे से पूछताछ करेगी।
एटीएस ने बनाया था प्लान
सूत्रों के हवाले से एटीएस की छानबीन में सामने आया है कि घुसपैठ करा रहे सिंडीकेट में अलग-अलग दायित्व बांटे गए थे। गिरोह में शामिल दिल्ली निवासी अब्दुल अव्वल ने दिल्ली, असम व उत्तरप्रदेश के कुछ नागरिकों के आधार कार्ड हासिल कर उनकी मदद से ऑनलाइन खाते खोलता है।
ऐसे की जाती थी फंडिंग
दिल्ली का निवासी अब्दुल गफ्फार विदेशी से आई रकम को उन खातों की मदद से अवैध ढंग से निकालता था, जबकि बंगाल निवासी अबु सालेह द्वारा संचालित एनजीओ के एफसीआरए खातों में विदेश के विभिन्न संगठनों से फंडिंग कराता था। उस रकम को अब्दुल्ला गाजी व अन्य सदस्यों के द्वारा बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की मदद के लिए पहुंचाया जाता था।
हवाला के जरिए रकम एक सक्रिय सदस्य नजिबुल शेख तक पहुंचाई जाती थी। घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेजों की मदद से उत्तरप्रदेश के अलावा मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु व अन्य राज्यों में शरण दिलाई जा रही थी। घुसपैठ कर आए कई बांग्लादेशी नागरिकों के नाम भी सामने आए हैं।
महिलाओं की तस्करी भी कर रहा था गिरोह
गिरोह महिलाओं की तस्करी भी कर रहा था। आदिलुर्रहमान बीते दिनों अपने सहयोगी विक्रम की मदद से बांग्लादेश की एक महिला को भी घुसपैठ कराकर लाया था। महिला का छद्म नाम से आधार कार्ड बनवाने के बाद उसे इब्राहिम नाम के व्यक्ति को बेंच दिया गया था। एटीएस इसे लेकर भी छानबीन कर रही है। उल्लेखनीय है कि एटीएस ने पूर्व में भी कई बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा था। तब जांच में सामने आया था कि बांग्लादेशी व रोहिंग्या महिलाओं की पहचान बदलकर उनके भारतीय पासपोर्ट बनवाकर उन्हें विदेश भी भेजा जा रहा है।




























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