सूर्यास्त के बाद की गर्मी दिन की चिलचिलाती धूप से भी अधिक ख़तरनाक और जानलेवा हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जब रात का तापमान कम नहीं होता, तो मानव शरीर को दिनभर की तपिश से उबरने का मौका नहीं मिलता, जिससे स्ट्रोक, दिल के दौरे और गंभीर डिहाइड्रेशन का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है।
मई-जून के महीने में जब भी हम भीषण गर्मी या ‘लू’ की बात करते हैं, तो हम दोपहर की तपती धूप और झुलसाने वाली हवाओं पर चर्चा करते हैं और हम यह मान लेते हैं कि सूरज ढलने के बाद मौसम ठंडा हो जाएगा और राहत मिलेगी। लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोध और डॉक्टरों की चेतावनियां एक बेहद डरावने सच की ओर इशारा कर रही है।
वैज्ञानिक शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि सूर्यास्त के बाद रहने वाली अत्यधिक गर्मी दिन की धूप से कहीं अधिक ख़्तरनाक साबित हो रही है। तापमान का यह ‘रात्रिकालीन चक्र’ चुपचाप लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है आइए जानते हैं कि आखिर सूरज डूबने के बाद की गर्मी हमारे शरीर के लिए इतनी घातक क्यों हो जाती है?–
शरीर को नहीं मिलती राहत: दिन के समय जब हम अत्यधिक गर्मी का सामना करते हैं, तो हमारा शरीर पसीना बहाकर खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है। प्रकृति का नियम है कि रात में तापमान गिरता है, जिससे हमारे शरीर को आराम करने और आंतरिक तापमान को सामान्य पर लाने का समय मिलता है, लेकिन जब रातें भी गर्म रहने लगती हैं, तो शरीर की यह रिकवरी प्रक्रिया ठप्प होजाती है। लगातार कई घंटों तक ऊंचे तापमान में रहने के कारण हृदय और किडनी पर दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है।
कौन हैं सबसे ज़्यादा खतरे में?: रात की इस जानलेवा गर्मी का सबसे ज़्यादा असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से ही शुगर, अस्थमा या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित मरीजों पर पड़ता है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोग, जो छोटे और बिना वेंटिलेशन वाले कमरों में रहते हैं, वे इसका पहला शिकार बनते हैं।
बचाव के ज़रूरी उपाय
रात को सोने से पहले पर्याप्त पानी पिएं, भले ही प्यास न लगी हो। शाम को सूरज ढलने के बाद खिड़कियां खोलें ताकि ठंडी हवा का आदान-प्रदान हो सके। कमरों में भारी पर्दों की जगह हल्के सूती पर्दों का प्रयोग करें। यदि एसी नहीं है, तो सोने से पहले पैरों को ठंडे पानी में डुबोएं या गीले तौलिए का इस्तेमाल करें। मिट्टी के घड़े का पानी पिएं और रात में सोने से ठीक पहले भारी या प्रोटीन से भरपूर भोजन करने से बचें, क्योंकि यह शरीर के चयापचयको बढ़ाकर आंतरिक गर्मी को और बढ़ाता है।




























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