जून की तपती रातें, भयंकर उमस और शरीर से बहता पसीना न केवल हमारी नींद छीन लेते हैं, बल्कि मस्तिष्क में एक अजीब सी बेचैनी और चिड़चिड़ापन पैदा कर देते हैं। आज हम कमरों को ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशनर (AC) पर निर्भर हैं, जो पर्यावरण और हमारी हड्डियों, दोनों को खोखला कर रहा है। लेकिन जरा सोचिए, जब बिजली नहीं थी, तब हमारे पूर्वज और राजा-महाराजा चिलचिलाती गर्मियों में महलों को कैसे ठंडा रखते थे? उनका रहस्य था—’खस’ (Vetiver)। यह केवल एक सुगन्धित घास की जड़ नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे भयंकर ‘पित्त’ (गर्मी) को शांत करने वाला, रक्त को शुद्ध करने वाला और वातावरण को बर्फ सा शीतल कर देने वाला ‘प्राकृतिक एसी’ माना गया है।
पेशाब की जलन, घमौरियों और अनिद्रा का अचूक इलाज
जून की भयंकर उमस में अक्सर पेशाब में भयंकर जलन, अत्यधिक पसीना आना, पसीने की दुर्गंध और शरीर पर लाल घमौरियां निकलने की समस्या होती है। खस का पानी शरीर के भीतर एक ‘कूलिंग ब्लैंकेट’ की तरह काम करता है। यह किडनी को डिटॉक्स करके मूत्र की जलन को रातों-रात खत्म करता है। रक्त शुद्ध होने से त्वचा की भयंकर खुजली और जलन शांत होती है, और रात को इसका सोंधा पानी पीने से मस्तिष्क को ऐसी शांति मिलती है कि अनिद्रा (Insomnia) के रोगी भी चैन की नींद सो जाते हैं।
यह कैसे काम करता है? (वाष्पीकरण और अरोमाथेरेपी का विज्ञान)
बाहरी शीतलता (कमरों के लिए): खस की जड़ों में पानी को सोखने और उसे लंबे समय तक रोके रखने की अद्भुत क्षमता होती है। जब खस की जड़ों से बनी चटाई (खस की टट्टी) को खिड़की या दरवाजे पर बांधकर उस पर पानी छिड़का जाता है, तो बाहर की गर्म हवा (लू) जब इस गीली खस से टकराकर कमरे में आती है, तो ‘वाष्पीकरण’ (Evaporation) के विज्ञान के कारण हवा का तापमान 5 से 8 डिग्री तक गिर जाता है।
भीतरी शीतलता (शरीर के लिए): आयुर्वेद में खस अत्यंत ‘शीत वीर्य’ (ठंडी तासीर) वाली औषधि है। इसके भीतर एक प्राकृतिक ‘एसेंशियल ऑयल’ होता है। जब खस का पानी पिया जाता है, तो यह रक्त की अम्लता (Acid) को सोख लेता है। इसकी सोंधी, मिट्टी जैसी खुशबू सीधे हमारे नर्वस सिस्टम (मस्तिष्क) पर काम करती है और तनाव के हार्मोन (Cortisol) को घटाकर गहरी नींद (Deep Sleep) लाती है।
उपयोग की सरल और प्रामाणिक विधि
पीने के लिए (खस जल): बाजार से खस की असली सूखी जड़ें (Vetiver roots) ले आएं। 15-20 ग्राम जड़ों को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। रात को एक मिट्टी के घड़े (या जग) में पानी भरकर ये जड़ें उसमें डाल दें। सुबह तक पानी में खस का औषधीय गुण और सोंधी खुशबू आ जाएगी। दिन भर इसी प्राकृतिक खस जल को पिएं। (एक बंडल को आप 3-4 दिन तक इस्तेमाल कर सकते हैं, बस पानी बदलते रहें)।
कमरे के लिए: यदि संभव हो, तो खिड़कियों पर खस की चटाई लगाएं और दोपहर में उस पर पानी छिड़कें। इसकी खुशबू और ठंडी हवा आपके कमरे को किसी हिल स्टेशन जैसा बना देगी।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
www.bschauhan09.blogspot.com, www.facebook.com/bschauhan09




























Views Today : 4
Views Last 7 days : 109
Views Last 30 days : 847
Views This Year : 8221
Total views : 108694
Who's Online : 0
Your IP Address : 162.251.85.8