एक ही ब्रांड नाम से अलग-अलग तरह की दवाएं बेचने की फार्मा कंपनियों की प्रैक्टिस अब गंभीर सवालों के घेरे में है। कई राज्यों की दवा निगरानी इकाइयों और मरीज समूहों ने शिकायत की है कि कंपनियां एक ही दवा ब्रांड का ब्रांड एक्सटेंशन बनाकर उसके अलग-अलग फॉमुर्लेशन बाज़ार में उतार रही हैं। इससे मरीजों में भ्रम बढ़ रहा है और ग़लत दवा खरीदने का ख़तरा भी पैदा हो रहा है। अब केंद्र सरकार इस मुद्दे पर नए नियमन लाने पर विचार कर रही है। दरअसल एक ब्रांड नाम पर दर्द की दवा, बुखार की दवा और एंटीबायोटिक तीनों अलग-अलग रूप में बिकते मिल जाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने स्टेकहोल्डर मीटिंग बुलाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें फार्मा कंपनियों, दवा विशेषज्ञों, राज्यों के नियामकों और उपभोक्ता संगठनों की राय ली जाएगी।




























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