सब्ज़ियों में एक विशेष नाम है बथुआ। बथुआ खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होता है। पुराने जमाने से लेकर आज तक बथुए का साग, पराठा या रोटी अमूमन हर घर की सर्दियों की थाली में ज़रूर दिखता है। आयुर्वेद में भी इसे शरीर की सफाई करने वाला नेचुरल डिटॉक्स बताया गया है।
बथुआ विटामिन A, C, आयरन और कैल्शियम से भरपूर होता है। ये डाइजेशन को दुरुस्त करता है और कब्ज को दूर भगाता है। जो लोग गैस, एसिडिटी या पेट के भारीपन जैसी दिक्कतों से परेशान रहते हैं। उनके लिए यह किसी दवा से कम नही।
इतना ही नहीं बथुआ खून को साफ करता है और स्किन को चमकदार बनाता है। मुंहासे, खुजली या रैशेज जैसी स्किन प्रॉब्लम्स में इसका असर जल्दी दिखता है। बथुए का रस पीने से लिवर मज़बूत होता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।
किन लोगों को नहीं खाना चाहिए बथुआ
बथुआ की तासीर हल्की गर्म होती है, इसलिए अगर किसी को किडनी स्टोन की शिकायत है, तो उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहि। क्योंकि इसमें ऑक्लेसट पाया जाता है, जो पथरी को बढ़ा सकता है। गर्भवती महिलाएं भी इसे खाने से बचें या डॉक्टर से पूछ कर ही इसका सेवन करें।
कब्ज के लिए अच्छा है
बथुआ में भरपूर मात्रा में आहारीय फाइबर पाया जाता है, जो मल त्याग को नियंत्रित करने में मदद करता है और पेट फूलने और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं से निजात दिलाता है। रोजाना बथुआ का सेवन करने से आंत का स्वास्थ्य बेहतर होता है और आपका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है।
बथुआ कैसे उगाएं?
बथुआ उगाने के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच मिट्टी में पतली परत में बीज बोएं। पौधे को पानी दें और पूरी धूप में रखें। इसके अलावा कीटों से बचने के लिए नीम के तेल का प्रयोग करना असरदार हो सकता है।




























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