संकल्प शक्ति। कश्मीर में हिन्दुओं को निशाना बनाए जाने से देशभर में आक्रोश का माहौल है। कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं को आतंकवादियों के द्वारा चुन-चुनकर निशाना बनाए जाने के सिलसिले को रोकने के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा जो कदम उठाए जा रहे हैं, उनकी सार्थकता तभी है, जब वे आतंकियों पर लगाम लगाने के साथ ही घाटी के अल्पसंख्यकों को पूर्णरूप से सुरक्षा व्यवस्था दी जाए। यद्यपि यह उचित है कि घाटी में कार्यरत कश्मीरी हिंदुओं को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया गया है, लेकिन इसकी क्या गारंटी कि उन्हें जहाँ स्थानान्तरिक किया जा रहा है, वे स्थान उनके लिए सुरक्षित साबित होंगे? यह प्रश्न इसलिए उत्पन्न हुआ है, क्योंकि आतंकी कहीं भी, किसी को भी अपनी गोली का निशाना बनाने में सक्षम दिखाई दे रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि आतंकियों नेे तहसील, स्कूल, बैंक आदि में घुसकर हिंदुओं-सिखों को निशाना बनाया है। इसी कारण उनमें खौफ पैदा हुआ है और वे पलायन करने के लिए मज़बूर हुए हैं। तथापि इस बात की आवश्यकता है कि कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही आतंकियों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन और सहयोग करने वालों के विरुद्ध भी सख़्त दण्डात्मक कार्यवाही की जाए और जब तक ऐसे लोगों को सबक नहीं सिखाया जाएगा, तब तक स्थिति में सुधार आना संभव नहीं है। आतंकियों को नेस्तनाबूद करने के लिए उन कारणों की तह तक जाना पड़ेगा, जिसकी वजह से ऐसी खौफनाक स्थिति पैदा हुई है।





























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