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सद्गुरुदेव जी महाराज के श्री चरणों से प्रवाहित है दिव्य अनुष्ठानों की गंगा: सौरभ द्विवेदी

संकल्प शक्ति, कन्नौज। भगवती मानव कल्याण संगठन के तत्त्वावधान में दिव्य अनुष्ठानों का प्रवाह देशस्तर पर चल रहा है। इसी क्रम में दिनांक 18-19 दिसम्बर को शिवाय गार्डन, सरीफापुर, निकट-पाल चौराहा, तिर्वा रोड, कन्नौज, उत्तरप्रदेश में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ सम्पन्न हुआ।

   समापन बेला पर भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव व भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप’ जी ने परिवर्तनशील जगत् के बारे में विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘‘आध्यात्मिक तपस्थली पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम में सद्गुुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज नित्यप्रति अनुष्ठान करते हैं, साधना करते हैं और उन्हीं के श्रीचरणों से ये 24-24 घंटे के दिव्य अनुष्ठानों की गंगा पूरे देश में प्रवाहित हो रही है।

   भाईयों-बहनों परिवर्तन संसार का नियम है और एक-एक अणु, एक-एक परमाणु हर समय बदल रहा है। हम इस तथ्य को जानें या न जानें, अणु-परमाणु को हम देख नहीं पाते, लेकिन व्यक्ति जब पैदा होता है, तो शिशु होता है और मृत्यु की शैय्या की अवस्था तक उसके शरीर में कई परिवर्तन देखने को मिलते हैं। आपने जिस स्थान को 25-30 साल पहले देखा होगा और यदि उस स्थान को आज देखेंगे, तो बहुत कुछ बदला हुआ नज़र आएगा। परिवर्तन का यह साक्षात प्रमाण है। सबकुछ परिवर्तनशील है, यह संसार है परिवर्तन होगा ही।

  परम पूज्य सद्गुरुदेव जी ने कहा है कि ‘अगर परिवर्तन संसार का नियम है, परिवर्तन होगा ही, तो परिवर्तन ऐसा होना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों का भी उत्थान हो सके।’ अगर कोई युग पुरुष, जैसे भगवान् श्रीकृष्ण न आए होते, उनका हस्तक्षेप न होता, तो भी तो परिवर्तन हो रहा था, लेकिन वह परिवर्तन असुरत्व का था। दुर्योधन के साथ जितने भी कौरव थे, पाँच पाण्डव के दुश्मन बन चुके थे, अनीति-अन्याय-अधर्म का वातावरण बनाकर पूरा का पूरा राज्य हड़प लेना चाहते थे, उनकी जो दुर्गति हुई, इसका इतिहास गवाह है। इसको ऐसा समझ लीजिए कि जो भाई-भाई का न रहा, उसकी दुर्गति अवश्यम्भावी है। श्रीकृष्ण भगवान् ने कहा कि ‘मैं ऐसा परिवर्तन नहीं चाहता, मैं हिन्दू सनातनधर्म की स्थापना करके जाऊंगा। और, इस कलिकाल में सच्चिदानंदस्वरूप सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज  अपने लाखों शिष्यों को साथ में लेकर सत्यधर्म की स्थापना का कार्य कर रहे हैं, अपने कर्मवान शिष्यों को राष्ट्र की रक्षा और मानवता की सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ा रहे हैं।

    अत: यह सौभाग्य है हमारा कि हम देश के लिए, सनातनधर्म के लिए और मानवता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं। जबकि, पशु तो केवल अपने लिए जीते हैं और यदि मनुष्य भी पशुवत जीवन जीने लगे, तो उसके लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और कुछ हो ही नहीं सकता। यह जीवन चन्द दिनों का है, हम इस धरती पर कुछ दिनों के लिए आए हैं, तो क्यों न मनुष्योचित कर्म करके अपने जीवन को सफल बना लें?

आज जो नशामुक्त होगया, मांसाहारमुक्त होगया, चरित्रवान् बन गया, जिसने अपने घर में ‘माँ’ की ज्योति जलाना शुरू कर दिया और जो भगवती मानव कल्याण संगठन से जुड़कर गुरुदेव जी के द्वारा प्रदत्त क्रमों को अपना चुके हैं, उनके घर के लोग तो बदल ही रहे हैं, उनके नाते-रिश्तेदारों के घरों में भी परिवर्तन आता है, सुख-शांति का प्रादुर्भाव होता है। तो, जो पात्रता बड़े-बड़े साधु-सन्त नहीं प्राप्त कर पाए, वह पात्रता सद्गुुरुदेव जी महाराज के छोटे-छोटे शिष्यों ने प्राप्त कर लिया है।’’

     सारसौल, कानपुर। भगवती मानव कल्याण संगठन सभी जाति, धर्म, सम्प्रदाय के लोगों को साथ लेकर समाजसुधार की दिशा में कार्य कर रहा है। सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने अपने शिष्यों को चेतनावान् बनाया है, कर्मठ बनाया है, जिससे समाजसुधार के कार्य में आने वाली कठिनाईयों को पार करते हुए वे अपने लक्ष्य को पूरा कर सकें। 

     दिनांक 19-20 दिसम्बर को सूर्या मैरिज हॉल, सारसौल, कानपुर, उत्तरप्रदेश में आयोजित 24 घंटे के श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ के समापन अवसर पर धाराप्रवाह चेतनात्मक उद्बोधन देते हुए सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी जी ने कहा कि ‘‘मध्यप्रदेश में स्थापित पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम में केवल पूजा-पाठ, योग-ध्यान-साधना के क्रम ही नहीं होते, अपितु लोगों को नशे-मांसाहार, जातिभेद, छुआछूत से मुक्तचरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी और परोपकारमय जीवन अपनाने की प्रेरणा दी जाती है और आज करोड़ों लोग परम पूज्य गुरुवरश्री से आशीर्वाद पाकर अपने जीवन की दशा और दिशा बदल चुके हैं। हम लोग आश्रमसे यहाँ केवल चिन्तन, भाषण देने नहीं आते, बल्कि आपके साथ माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की भक्ति में, उनके गुणगान में सहभागी बनने आते हैं, आप लोगों का साथ पाने के लिए आते हैं। नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् हज़ारों-हज़ार धर्मप्रेमियों का यह संगम नित्यप्रति देखने को नहीं मिलता।

     परम पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया है कि आप सभी लोग चेतनावान् बनें, पुरुषार्थी बनें। भगवती मानव कल्याण संगठन के उपस्थित सभी सदस्य, सभी धर्मप्रेमी जन, आप लोग कभी अपने आपको कमज़ोर व असहाय मत समझना, क्योंकि आप एक योगी, एक ऋषि से जुड़े हैं।  उनकी चेतनातरंगें आपके घरों में काम करती हैं। यदि आप सुबह-शाम ‘माँ’-गुरुवर की साधना-आराधना करते हैं, श्री दुर्गाचालीसा का पाठ करते हैं, तो वे चेतनातरंगें आपके जीवन को सुख-शांति से परिपूर्ण करने का  मार्ग प्रशस्त करती हैं।

सबसे पहले जीवन की सुचारुता के लिए आवश्यक है कि आपका शरीर स्वस्थ रहे। इसके लिए आपको नित्यप्रति योग-ध्यान-प्राणायाम, साधना-आराधना के माध्यम से ‘माँ’ की कृपा प्राप्त करें, जिससे आपका शरीर और मन स्वस्थ रहे, निरोगी रहे, तभी तो अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन निश्चिन्ततापूर्वक कर सकोगे। भक्तिमार्ग में केवल श्री दुर्गाचालीसा का पाठ ही पर्याप्त है, लेकिन आपके भावों में शुद्धता, आपके भावों में पवित्रता होनी चाहिए और यदि आपको भावों में शुद्धता, पवित्रता है, तो आप घर बैठे ‘माँ’ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।’’

गोण्डा। दिनांक 20-21 दिसम्बर को रामायणम मैरिज हॉल, निकट दुर्गामंदिर, सिविल लाइन गोण्डा, उत्तरप्रदेश में आयोजित 24 घंटे के श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ के समापन अवसर पर अपने उद्बोधन में भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव और भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप’ जी ने कहा कि ‘‘ माना कि अंधेरा घना है, लेकिन एक ज्योति जलाना कब मना है? भावार्थ यही है कि हर व्यक्ति अपने-अपने हिस्से के कर्त्तव्य का निर्वहन करते हुए चले।  हम सभी ने यहाँ पर 24 घंटे का अनुष्ठान सम्पन्न किया। इसका तात्पर्य यह नहीं कि, हमने केवल अपना कल्याण किया, अपितु इसका प्रभाव यहाँ पर उपस्थित सभी लोगों के साथ ही समाज पर भी पड़ता है।

 सबसे पहले हमारा कर्त्तव्य है राष्ट्र की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा तभी होगी, जब हम पूर्णरूपेण  नशामुक्त होंगे, पूरा समाज नशामुक्त होगा। इसके लिए एक-एक व्यक्ति को मज़बूत बनना पड़ेगा। हमारा देश कभी स्वतंत्र नहीं होता, यदि सभी अहिंसा-अहिंसा का राग अलापते रहते। क्रांतिकारियों ने जब दृढ़ता के साथ संघर्ष किया, तब जाकर देश स्वतंत्र हुआ। तो, जब तक हम देश को नशामुक्त नहीं कर लेते, तब तक देश पूरी तरह से स्वतंत्र होगया है, यह नहीं कहा जा सकता और इसके लिए हमें दृढ़ता के साथ आवाज़ उठाना पड़ेगा, हमें मज़बूत बनना पड़ेगा। 

  भगवती मानव कल्याण संगठन देश की युवाओं का आवाहन करता है कि आओ राष्ट्र की रक्षा के लिए, धर्म की रक्षा के लिए, मानवता की सेवा के लिए साधक बनो, अपने आपको पूरी तरह नशामुक्त कर लो, अपने आपको मज़बूत बना लो। 

पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम की स्थापना के बाद स्थापना दिवस पर पहली बार शक्ति चेतना जनजागरण शिविर होने जा रहा है, उस शिविर में शामिल होने के लिए आप सभी लोगों को मैं आमंत्रित करता हूँ। सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की पावन उपस्थिति में वहाँ जो दिव्य आरतियाँ होंगी, उसके प्रभाव से आपको दिव्य चेतना की प्राप्ति होगी, उसके प्रभाव से आपको आपकी सभी समस्याओं का समाधान प्राप्त होगा। बड़ा-से-बड़ा नशेड़ी भी यदि नशामुक्त होने का संकल्प ले लेगा, तो वह उस दिव्य आरती के प्रभाव से नशामुक्त होकर जाएगा।

मैं यहाँ पर उपस्थित भगवती मानव कल्याण संगठन के सभी सदस्यों, सभी कार्यकर्ताओं से कहता हूँ कि अपने साथ अपने रिश्तेदारों, परिचितों को भी इस शिविर में लेकर आएं, जिससे उनको भी दिव्य आरतियों से उत्सर्जित चेतनातरंगों की दिव्यता की अनुभूति हो सके और सभी के जीवन में सुख-शान्ति आ सके।

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