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अपना दीपक स्वयं बनो: सौरभ द्विवेदी

रीठी, कटनी। शुद्धता, सात्विकता का जीवन ही देवी-देवताओं को प्रिय है। नशा-मांसाहार करने वाले और चरित्रहीन व्यक्ति, चाहे कितना ही पूजा-पाठ क्यों न कर लें, उन्हें देवी-देवताओं की कृपा मिल ही नहीं सकती।

ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से दिनांक 27-28 दिसम्बर 2025 को श्री राम-जानकी मंदिर प्रांगण, थाने के सामने, रीठी, ज़िला-कटनी, मध्यप्रदेश में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा पाठ हज़ारों भक्तों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

इस पावन अवसर पर भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव व भारतीय शक्ति चेतना  पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप’ जी ने आत्मकेन्द्रित होकर कहा कि ‘‘हम सभी जानते हैं कि हमारा जीवन परमसत्ता माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की देन है। जिस प्रकार हम अपने घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए, कुछ-न-कुछ पाने के लिए उनकी चरण  वन्दना करते हैं, उसी प्रकार जिसने हमें यह जीवन दिया है, माता जगदम्बे का आशीर्वाद पाने के लिए  उनकी भक्ति करनी पड़ती है, लेकिन इसके लिए हमें शुद्धता, सात्विकता का जीवन धारण करना पड़ेगा।

हमें देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, लेकिन कब? जब हम सात्विकता का, शुद्धता की जीवन जीते हैं, नशा-मांसाहार व दुश्चरित्रता से मुक्त जीवन जीते हैं। अपवित्र मानसिकता के व्यक्ति के घर में हमेशा अशान्ति का वातावरण बना रहता है। यदि शुद्धता, पवित्रता का जीवन जीते हुूए पूजा-पाठ, साधना-आराधना की जाए, तो जीवन बदल जाता है और यदि देखना है, तो जो लोग भगवती मानव कल्याण संगठन से जुड़े हैं, जो परम पूज्य गुरुवरश्री के शिष्य हैं, उनके जीवन में जाकर देखें कि वे किस प्रकार का जीवन जीते हैं? कैसी साधना करते हैं कि उनके जीवन में हर समय चैतन्यता बनी रहती है?

ऋषिवर के शिष्य साधना के माध्यम से आत्मकल्याण के साथ जनकल्याण भी करते हैं, वे अपने घर में भी पूजा-पाठ करते हैं, तो इसी भावना को लेकर करते हैं, इसीलिए उनके घर-परिवार में सुख-शांति-समृद्धि का वास रहता है। आप लोग भी अपने-अपने घर में साफ-सुथरे स्थान पर ‘माँ’-गुरुवर की छवि को स्थापित करें और जो आरतीक्रम यहाँ पर सम्पन्न हुआ, उसी अनुरूप आरतीक्रम करिए। अगरबत्ती हो, तो जला दीजिए, शुद्ध घी हो, तो दीपक जला दीजिए और यदि ये सामग्रियाँ नहीं हैं, तो भाव का दीपक जलाईए। इससे अच्छा और कुछ हो ही नहीं सकता।

परम पूज्य गुरुवर ने कहा है कि ‘आपके घर में जो भी पूजन सामग्री हो, उसे लेकर पूजन स्थल पर बैठ जाइए और पूर्ण सात्विक भावों के साथ एकाग्रचित्त मन्त्रों का जाप करिए, ध्यान का क्रम करिए, फिर देखिए कि आपके जीवन में परिवर्तन आता चला जाएगा, बड़ी-से-बड़ी समस्याओं का समाधान सहज ही होता चला जाएगा।’

एक बात और, आपके घर में यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन कर रहा है, तो समझ लेना कि पूजा-पाठ का कोई भी लाभ प्राप्त नहीं होगा। इसलिए पहले स्वयं नशामुक्त जीवन अपनाइए और अपने परिवार के हर व्यक्ति को नशामुक्त बनाईए। यदि देवी-देवताओं का, परम पूज्य गुरुवरश्री का आशीर्वाद प्राप्त करना है, तो अपने घर-परिवार को नशामुक्त करना ही होगा। ध्यान रखें, जहाँ पर नशे का सेवन होता है, वहाँ तमोगुण होता है और जहाँ तमोगुण का वास रहता है, वहाँ पर देवी-देवताओं का आशीर्वाद कभी नहीं मिलता। जब तक आप अपने दीपक स्वयं नहीं बनोगे, तब तक आपका कल्याण कोई नहीं कर सकता।  

अपना दीपक स्वयं बनो और यही गुरुवरश्री कहते हैं कि ‘मैं तुम्हें चलाने के लिए आया हूँ और मेरे बताए रास्ते पर  तुम्हें स्वयं चलना पड़ेगा।’ आप लोग पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम आईए; सद्गुरुदेव जी महाराज के आशीर्वाद और ‘माँ’ की कृपा से आपके जीवन का अंधेरा दूर होगा, निराशा दूर होगी, आलस्य दूर होगा और सिद्धाश्रम की ऊर्जा से आपका जीवन बदलता चला जाएगा। तो, आईए मैं आप सभी का आवाहन करता हूँ।’’

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