नई दिल्ली। भारत में स्वास्थ्य शोध को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए 6,640 नई फेलोशिप, ट्रेनिंग प्रोग्राम और स्टार्ट अप रिसर्च ग्रांट की घोषणा की है। यह पूरा ब्लूप्रिंट दिसंबर 2025 में जारी संशोधित दिशानिदेर्शों में शामिल है, जिसके तहत पहली बार मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और राष्ट्रीय संस्थानों को जोड़कर देशभर में रिसर्चर तैयार करने का बड़ा मिशन शुरू किया है।
सरकार का उद्देश्य है कि क्लिनिकल सर्विस देने वाले डॉक्टर अब रिसर्चर और साइंटिस्ट की भूमिका भी निभाएं, ताकि भारत अपने स्वास्थ्य समाधान खुद तैयार कर सके। नई दिल्ली स्थित स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की नई गाइडलाइन में एमबीबीएस और पीजी छात्रों पर सबसे बड़ा फोकस है।
छात्रों मिलेगी रिसर्च फेलोशिप
आने वाले दो वर्षों में चार हज़ार से अधिक एमबीबीएस व बीडीएस छात्रों को रिसर्च फेलोशिप दी जाएगी, जिन्हें छह महीने तक किसी मान्यता प्राप्त प्रोजेक्ट पर काम करना होगा और लगभग 60 हज़ार रुपये तक का मानदेय मिलेगा। मेडिकल शिक्षा में पहली बार रिसर्च को शुरुआती स्तर से अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित किया गया है। इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेजों को 25-25 लाख रुपये तक की ग्रांट दी जाएगी, ताकि वे रिसर्च लैब, डेटा यूनिट, बॉयोस्टैटिसटिक्स सपोर्ट और एथिक्स कमेटी की संरचना मजबूत कर सकें।





























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