नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों की चार साल की सेवाओं और कौशल को मान्यता देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके आधार पर अग्निवीर आसानी से स्नातक कोर्सों में प्रवेेश ले सकेंगे, जहां उन्हें अपने इस कौशल अनुभव का लाभ मिलेगा। यूजीसी के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार के अनुसार अग्निपथ युवाओं के विकास से जुड़ी अहम योजना है।
इस योजना के तहत सशस्त्र सेनाओं से जुडऩे वाले युवाओं में बड़ी संख्या कौशल विकास व तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवाओं की होगी। ऐसे में इनके अनुभवों के आधार पर एक फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, जिसमें चार साल के उनके अनुभव को जोड़ा सकेगा। इस दिशा में यूजीसी जल्द ही काम शुरू करेगा।
केवल चार साल के लिए सेना में भर्ती
अग्निपथ भर्ती योजना के तहत सैनिकों को केवल चार साल के लिए भर्ती किया जाएगा। इसके लिए युवक की उम्र 17.5 से 21 साल तक होनी चाहिए। इस तरह सेनाओं में छोटी अवधि के लिए सैनिकों की भर्ती का मार्ग प्रशस्त होगा। इस योजना के तहत थलसेना, वायुसेना और नौसेना में युवकों की भर्ती की जाएगी। इस योजना से हज़ारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
20 प्रतिशत मिल सकता है अवसर
सरकार की इस योजना का लक्ष्य रक्षा बलों का खर्च और उम्र घटाने के सरकार के प्रयासों को धरातल पर उतारना है। चार साल के बाद 80 प्रतिशत सैनिकों को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा और आगे रोजगार के अवसर मुहैया कराने में सेना उनकी मदद करेगी। 20 प्रतिशत युवकों को सेना में बने रहने का अवसर मिल सकता है।
कितना मिलेगा पैकेज
राजनाथ सिंह ने प्रेस कान्फ्रेंस में बताया कि अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को पहले साल 4.76 लाख का सालाना पैकेज मिलेगा। ये पैकेज चौथी साल तक बढ़कर ये 6.92 लाख तक पहुंच जाएगा, यानि 57 हज़ार रुपये से ऊपर। चार साल की नौकरी के बाद युवाओं को 11.7 लाख रुपए की सेवा निधि दी जाएगी। इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।





























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