केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम जिसको तिरुवनंतपुरम् भी कहा जाता है, यहां का पद्मनाभ स्वामी मंदिर सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर भारत के सबसे प्रमुख वैष्णव मंदिरों में से एक है और तिरुवनंतपुरम् का ऐतिहासिक स्थल है। पूर्वी किले के अंदर स्थित इस मंदिर का परिसर बहुत विशाल है। इसका अहसास सात मंजिला गोपुरम् देखकर किया जा सकता है। केरल और द्रविड़ वास्तुशिल्प में निर्मित यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। पदमा तीर्थम, पवित्र कुंड, कुलशेकर मंडप और नवरात्रि मंडप इस मंदिर को और भी आकर्षक बनाते हैं। दो सौ साठ साल पुराने इस मंदिर में केवल हिंदू ही प्रवेश कर सकते हैं। पुरुष केवल सफेद धोती पहन कर यहां आ सकते हैं। इस मंदिर में दो वार्षिकोत्सव मनाए जाते हैं। इन समारोहों में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। यहां स्थित वेधशाला में गुलाब के फूलों का बेहतरीन संग्रह किया गया है। चिडिय़ाघर में देशी-विदेशी वनस्पति-जंतुओं का संग्रह है। रैप्टाइल हाउस में सांपों की अनेक प्रजातियां है। नीलगिरी लंगूर, भारतीय गैंडा, एशियाई शेर, रॉयल बंगाल टाइगर भी आपको दिख जाएंगे। कनक कुन्नु महल एक छोटी-सी पहाड़ी पर बना आकर्षक महल है। वहीं नेपियर संग्रहालय में आप कांसे से बनी हुई शिव, विष्णु, पार्वती और लक्ष्मी की प्रतिमाएं देख सकते हैं। शंखुमुखम बीच, कोवलम बीच, आट्टकाल देवी का मंदिर भी दर्शनीय है। फिर यहां समुद्र के किनारे लंबे-लंबे नारियल के वृक्ष और सागर में उठती-गिरती लहरें किले, महल, संग्रहालय, मंदिर तो पर्यटकों को खूब लुभाते हैं। सैलानी यहां के मनोरम दृश्यों को आंखों और कैमरों में कैद करके ले जाते हैं।




























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