Homeजनजागरणआज जिसे देखो, वही परेशान है, आख़िर क्यों?: बहन संध्या शुक्ला

आज जिसे देखो, वही परेशान है, आख़िर क्यों?: बहन संध्या शुक्ला

कुशीनगर, उ.प्र.। जनकल्याण को दृष्टिगत रखते हुए चल रहे दिव्य अनुष्ठानों के क्रम में दिनांक 14-15 मार्च को खागी बाबा कुटी परिसर, बाघनाथ वार्ड क्र.-1, हाटा, कुशीनगर, उत्तरप्रदेश में भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर भारतीय शक्ति चेतना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न संध्या शुक्ला जी ने अभिव्यक्ति दी कि ‘‘गुरुवर ने कहा है कि तुमने जो प्राप्त किया है, वह साधना के बल पर प्राप्त किया है। ठीक है तुम वेद नहीं पढ़ सकते, तुम्हें शास्त्रों का ज्ञान नहीं है, तुम्हें पूजा-पाठ की विधियों का ज्ञान नहीं है, तुम्हें कर्मकाण्ड नहीं मालूम, कोई बात नहीं, परेशान मत हो। मैं तुम्हें वेद-शास्त्रों का सार निकाल करके एक साधना प्रदान करता हूँ और गुरुवर ने हमें वह साधनाक्रम प्रदान किया, जिसे अपनाने से जीवन की दशा और दिशा बदल जाती है। आप नित्यप्रति सुबह-शाम ‘माँ’ का श्री दुर्गाचालीसा पाठ अपने घर पर करें, फिर पाएंगे कि आपके घर पर सुख-शांति के रूप में ‘माँ’ की कृपा बरस रही है।

आज कहीं-न-कहीं जिसे देखो, वही परेशान है। कोई बीमारियों से परेशान है, कोई किसी बाधा से ग्रसित है, कोई भौतिक समस्याओं से परेशान है, तो कोई सामाजिक समस्याओं से परेशान है। हर व्यक्ति के जीवन में कोई-न-कोई समस्या बनी हुई है। आख़िर, हमारे जीवन में ये समस्याएं आ क्यों रही हैं? क्या इसके मूल में जाने का कभी आपने प्रयास किया? परम पूज्य गुरुवर ने कहा है कि इसके मूल में है आपके कर्म। आप जिस प्रकार के कर्म करते हैं, वह आपका प्रारब्ध बन जाता है और प्रारब्ध को भोगना ही  पड़ता है, आप उससे बच नहीं सकते। अत: अपने कर्मों में सुधार करो। धर्मपथ पर बढ़ जाओ, मानवता की सेवा में अपने जीवन को लगा दो, राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने जीवन को लगा दो, तो तुम्हारे कर्म सुधर जाएंगे। कर्म सुधर जाएंगे, तो प्रारब्ध सुधर जाएगा और प्रारब्ध सुधर गया, तो तुम्हारे जीवन की सारी समस्याएं दूर होती चली जाएंगी।

सद्गुरुदेव जी महाराज की विचारधारा पर चलने से करोड़ों-करोड़ लोगों के जीवन में परिवर्तन आया है, तो आइए भाईयों और बहनों, सत्यधर्म की इस यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर चलें। मैं महिलाओं से भी कहना चाहती हूँ कि कर्मक्षेत्र में आगे बढ़िए। जो महिलाएं परिवार को, गृहस्थी को संभालती हैं, वह कोई साधारण कार्य नहीं है, पुरुषार्थ का कार्य है। एक घर चलाना, परिवार चलाना, समाज को चलाना, देश के लिए एक बहुत बड़ा योगदान है।’’

भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी (अनूप) जी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में बताया कि ‘‘किसी ने कहा है, घर में उपयोग के लिए औजार होना चाहिए, लेकिन उससे भी ज़रूरी है कि उसमें धार होना चाहिए। वैज्ञानिक कहते हैं कि 100 साल से घटते-घटते अब हमारा जीवन 60-70 साल में सिमटकर रह गया है। तो इस 60-70 साल का जो हमारा जीवन है उसमें धार है कि नहीं, उसमें चैतन्यता है कि नहीं, हमारे जीवन में आकर्षण है कि नहीं और यदि नहीं है, तो भगवती मानव कल्याण संगठन आपका आवाहन करता है। यह एक ऐसी मशीन है, जिसके सम्पर्क में आने पर हताश, निराश, परेशान, उदास, समस्याओं से ग्रसित व्यक्ति का जीवन रूपान्तरित होजाता है। ऐसी सशक्त विचारधारा है भगवती मानव कल्याण संगठन की, जिसे अपने मन में बिठा लिया और उस पर चल पड़े, तो क्षणभर में ही आपके जीवन में परिवर्तन आ जाता है और यह केवल कहने भर की बात नहीं, पूरे देश में 30 लाख से अधिक लोग हैं, जिनके जीवन में 30 वर्षों में आशातीत परिवर्तन हुआ है।

उद्बोधनक्रम के पश्चात् कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय ने क्रमबद्ध रूप से ‘माँ’-गुरुवर की दिव्यछवि के समक्ष नतमस्तक होकर नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जीने का संकल्प लिया।

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