लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान वैश्वीकरणका स्वरूप केवल ‘बाजारीकरण’ तक सीमित होकर रह गया है, जो मानवता के लिए ख़तरनाक है।
आपने अमेरिका और चीन जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि पश्चिमी देश कट्टरता फैला रहे हैं और उनकी सोच ‘स्वयं शक्तिशाली बनो और दूसरों को मिटा दो’ पर आधारित है। दुनिया में अशांति का मुख्य कारण यही कट्टर विचारधारा है।
मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम का वैश्वीकरण उपभोक्तावाद को बढ़ावा देता है, जबकि भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा पूरे विश्व को एक परिवार मानती है।





























Views Today : 9
Views Last 7 days : 274
Views Last 30 days : 856
Views This Year : 3350
Total views : 103823
Who's Online : 0
Your IP Address : 216.73.216.139