दुनियाभर में मशहूर अल्फांसो आम को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात में भारतीय किसान संघ की वालसाड इकाई ने दो साल पहले वालसाड हापुस के लिए जीआई टैग लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस मामले की पहली सुनवाई 30 अक्टूबर को हुई। अभी कुछ और सुनवाई बाकी हैं, उसके बाद ही कोई फैसला आएगा। कोंकण के कुछ किसान इस क़दम का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जीआई टैग मिलने से कोंकण अल्फांसो की पहचान कमजोर पड़ सकती है। कोंकण का हापुस अपनी मलाईदार और बिना रेशे वाली बनावट की वजह से दुनियाभर में जाना जाता है। किसानों का कहना है कि नकली अल्फांसो उनकी पहचान को नुक़सान पहुंचाएगा।
किसान संघ की ओर से आवेदन करने वाले प्रतिनिधि ने कहा कि अल्फांसो आम कर्नाटक से लेकर गुजरात के सूरत तक करीब 150-200 साल से उगाया जा रहा है। उनका कहना है, हमने सिर्फ वालसाड हापुस के नाम से जीआई टैग मांगा है, ताकि हमारी ब्रांड वैल्यू बढ़े। रत्नागिरी और देवगढ़ को पहले से टैग मिल चुका है, तो हमारे लिए भी ग़लत क्या है? हमारे आम का सीजन भी मई के बाद शुरू होता है, जब महाराष्ट्र का खत्म होजाता है। अब इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात के बीच विवाद खड़ा हो गया है। दोनों राज्यों के किसानों में खींचतान तेज हो गई है।




























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