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यह अनुष्ठान कोई साधारण अनुष्ठान नहीं है, बल्कि सच्चिदानंदस्वरूप सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा प्रदत्त साधना है: बहन पूजा शुक्ला

संकल्प शक्ति। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक 26-27 दिसम्बर को ग्राम-अतरमरा, तहसील-छुरा, ज़िला-गरियाबंद में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ सम्पन्न हुआ।

   समापन बेला पर भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न पूजा शुक्ला जी ने उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘श्री दुर्गाचालीसा पाठ का यह अनुष्ठान कोई साधारण साधना नहीं है, बल्कि इस साधना को स्वयं सच्चिदानंदस्वरूप सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा प्रदान किया गया है, जिन्होंने माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा के दर्शन प्राप्त किए हैं। आपको कोई कथा करानी हो, कोई रास-रंग का कार्यक्रम करना हो,  कोई भी कार्यक्रम अपने गांव में करवा सकते हैं। किन्तु, यदि आपको माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा का 24 घंटे का यह चालीसा पाठ कराना है, तो करोड़ों रुपए खर्च करके भी इस साधना को प्राप्त नहीं कर सकते। अगर, आपके गांव में यह साधना सम्पन्न हुई है, तो कहीं-न-कहीं इस गांव में रहने वाले शक्तिसाधक-साधिकाओं ने साधना की होगी, आरतीक्रम करवाए होंगे, चालीसा पाठ के क्रम सम्पन्न किए होंगे, तब पात्रता निर्मित होने पर, परम पूज्य गुरुवरश्री ने आशीर्वाद दिया होगा।

    पात्रता का ही परिणाम है कि इस अतरमरा गांव में ‘माँ’ की इतनी बड़ी साधना करने का सौभाग्य आप लोगों को प्राप्त हुआ। जब आप अपने घर में छोटी सी पूजा करते हो, तो कहते हो कि घर का वातावरण कितना शान्तिमय है और जब नशा-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् साधक आत्मकल्याण व जनकल्याण की भावना को लेकर जहां भी साधना करते हैं, तो उस जगह की ऊर्जा कितनी प्रभावशाली होगी? इसका अनुभव आप लोगों को स्वयं हो रहा होगा।

   हम हमेशा आत्मकल्याण के लिए ही साधना करते रहे, लेकिन गुरुवरश्री ने हमें यह ज्ञान कराया कि  आत्मकल्याण के साथ जनकल्याण की भावना को लेकर साधना-अनुष्ठान करें, तभी ‘माँ’ की पूर्ण कृपा प्राप्त होगी, गुरु का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होगा।’

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 संगठन के केन्द्रीय महासचिव सिद्धाश्रमरत्न अजय अवस्थी जी ने अपनी चिरपरिचित शैली में कहा कि ‘‘यह मेरा सौभाग्य है कि छत्तीसगढ़ के इस गांव में आने का मुझे अवसर मिला, क्योंकि मुझे पता है कि माता भगवती की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता। यह योग बना होगा कि वर्ष 2025 के दिसम्बर माह में अमुक गांव में, अमुक स्थान पर ‘माँ’ का अनुष्ठान होगा, ‘माँ’ का गुणगान होगा और जिनको ‘माँ’ का आशीर्वाद प्राप्त करना बदा होगा, वे इसमें सम्मिलित होंगे।

भाईयों-बहनों, गुरुदेव भगवान् की एकांत व अखंड साधना का ही परिणाम है कि इतनी बड़ी संख्या में नशा-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् भक्त यहाँ  उपस्थित हुए और ‘माँ’ का गुणगान करके सभी इस दिव्य अनुष्ठान का लाभ प्राप्त कर सके। आज का दिन भी कोई साधारण दिन नहीं है, अपितु आज संकल्प का दिन है, अपने अवगुणों को त्यागने का दिन है। यदि आप लोगों ने यहाँ पर स्थापित ‘माँ’-गुरुवर की दिव्य छवि के समक्ष अपनी बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प ले लिया, तो खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे।

    भगवती मानव कल्याण की शाखा-गरियाबंद, छत्तीसगढ़ के लोगों को मैं हृदय से धन्यवाद देता हूँ कि आप लोगों ने इतना अद्भुत, इतना भव्य कार्यक्रम सम्पन्न किया।  

पोटियाडीह, धमतरी। दिनांक 27-28 दिसम्बर को बाज़ार चौक, ग्राम-पोटियाडीह, ज़िला-धमतरी, छत्तीसगढ़ में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ भगवती मानव कल्याण संगठन की शाखा-धमतरी के तत्त्वावधान में सम्पन्न हुआ।

  इस अवसर पर संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न पूजा शुक्ला जी ने आयोजित दिव्य अनुष्ठान की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि ‘‘यहाँ पर उपस्थित सभी गुरुभाई-बहनों और धर्मप्रेमी जनमानस को सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया है। हम आप सभी ने जो यहाँ पर साधना सम्पन्न की यह हमारी इष्ट माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की साधना है और इस साधना को परम पूज्य गुरुवरश्री ने प्रदान किया है। कहते हैं कि वही साधना फलीभूत होती है, जो सद्गुरु के द्वारा प्रदान की जाती है।

हमारे सद्गुरुदेव जी महाराज, जब शिष्य बनाते हैं, तो कान में मन्त्र नहीं देते। चूंकि वही सद्गुरु होता है, जो अपने शिष्य के साथ पूरे समाज का कल्याण चाहता है। इसलिए जब हमारे गुरुवर हमें शिष्यरूप में स्वीकार करते हैं, तो सबके सामने, सामूहिक रूप से गुरुमंत्र प्रदान करते हैं, जिससे उनके शिष्यों के साथ ही समाज के कानों में भी मंत्र की ध्वनि पहुंचे, जिससे सभी का कल्याण हो सके। परम पूज्य गुरुवर ने हमें हमारी आत्मा की जननी, देवाधिदेवों की जननी माता भगवती की सर्वकल्याणकारी साधना करने का मार्ग दे दिया, हमें जीने की राह दिखा दी, हमारे घरों में खुशियाँ ला दी, हमें आत्मावान बना दिया, हमें चेतनावान् बना दिया, हमें ज्ञानवान बना दिया। हमें ऐसे गुरुवर का शिष्य बनने का सौभाग्य मिला, इससे बड़े गर्व की बात और क्या हो सकती है?

इसीलिए हम गर्व के साथ कहते हैं कि हमारा शीश केवल हमारे गुरुवर के चरणों में झुक सकता है और ब्रह्मांड की कोई ताक़त इस शीश को कभी झुका नहीं सकती।’’

संगठन के केन्द्रीय महासचिव सिद्धाश्रमरत्न अजय अवस्थी जी ने कहा कि ‘‘भाईयों-बहनों, हमने अनन्त लोकों की जननी, हमारी आत्मा की जननी, जिन्होंने देवाधिदेवों को भी प्रकाशित कर रखा है, उनकी साधना यहाँ पर सम्पन्न की है। जब धन की आवश्यकता हुई, तो महालक्ष्मी का स्वरूप धारण किया, जब विद्या की आवश्यकता हुई, तो महासरस्वती का स्वरूप धारण किया और जब अन्यायी-अधर्मियों, असुरों के संहार की आवश्यकता हुई, तो महाकाली का स्वरूप धारण कर सम्पूर्ण मानवता का कल्याण किया। हे माता जगदम्बे, आपकी विराटता अद्भुत है, अनन्त है। आप प्रचण्ड ब्रह्मांड में रचती-बसती हैं, आप दया, ममता, करुणा में रचती-बसती हैं। तो जिनके हृदय में दया, ममता, करु णा के पावन भाव आ गए, उन्हें ‘माँ’ के दर्शन होजाते हैं। 

आदिकाल में श्री दुर्गासप्तशती की रचना महर्षि मार्कण्डेय जी ने की थी, जो युगों-युगों से प्रभावी है और आज इस  कलियुग में स्वयं सच्चिदानंदस्वरूप ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने हमें एक साधना पुस्तिका जन-जन के कल्याण हेतु दी गई है, जिसके माध्यम से युगों-युगों तक मानवता का कल्याण होगा।

भाईयों-बहनों, कभी भी ‘माँ’-गुरुवर के चरणों को मत छोड़ना। भगवान् श्रीराम के गुरु महर्षि विश्वामित्र थे, भगवान् श्रीकृष्ण के गुरु ऋषि संदीपन थे और हमारा परम सौभाग्य है कि हमारे गुरु सच्चिदानंदस्वरूप ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज हैं और हमारी इष्ट माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा हैं।’’

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