इंफाल। बुधवार को आदिवासियों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाओं को लेकर मणिपुर में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश सरकार द्वारा दिया गया है। हिंसाग्रस्त इलाकों में धारा 144 लागू है और 08 जि़लों में कफ्र्यू लगा दिया गया। आर्मी और असम राइफल्स की 55 टुकडिय़ों को तैनात किया गया है। और 9000 लोगों को राहत कैंपों में शिफ्ट किया गया है।
मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने गुरुवार की सुबह एक वीडियो मैसेज जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं, केंद्र ने पूर्वोत्तर राज्य के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती के लिए आरएएफ की टीमों को भी भेजा है।
आदिवासी और गैर-आदिवासी भिड़े
ज्ञात हो कि ऑल इंडिया ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन ने बुधवार को ट्राइबल सॉलिडेरटी मार्च बुलाया था। इसी दौरान आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों में झड़प हो गई। आदिवासी समुदाय उस मांग का विरोध कर रहा था, जिसमें डिमांड की जा रही है कि गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को शेड्यूल ट्राइब का दर्जा दिया जाए।
मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मैतेई समुदाय की डिमांड पर विचार करे और चार महीने के भीतर केंद्र को रिकमेंडेशन भेजे। इसी आदेश के बाद आदिवासी और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसा शुरू हो गई।
पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे
पुलिस ने बताया कि आदिवासियों के मार्च में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया। इसी दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसा भड़क उठी। हालात को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने कई राउंड आंसू गैस के गोले भी दागे, लेकिन हिंसा नहीं रुकी। इसके बाद सेना और असम राइफल्स को बुलाया गया। राज्य के इम्फाल पश्चिम, कैकचिंग थोऊबल, जिरिबाम, बिश्नुपुर, चूड़ाचंदपुर, कांगपोकपी और तेनग्नोउपाल में कर्फ्यू लागू किया गया है।





























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