दमोह। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक 28-29 जनवरी को ग्राम-बडय़ाऊ, जि़ला-दमोह में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ का आयोजन किया गया।
समापन बेला पर भारतीय शक्ति चेतना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न शक्तिस्वरूपा बहन संध्या शुक्ला जी ने उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ”साधना ही वह पथ है, जिस पर चलकर आत्मकल्याण और जनकल्याण किया जा सकता है। आम अवधारणा है कि कलियुग आ गया, घोर कलियुग आ गया है, चारों तरफ अनीति-अन्याय-अधर्म व्याप रहा है। सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का कहना है कि अभी और भयानक कलिकाल आना है और यदि इससे बचना है, तो शक्तिसाधक बनना पड़ेगा, माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की साधना-आराधना करनी होगी। इस कलियुग से परेशान मत हों, डरो नहीं, बल्कि इस कलियुग में अच्छी बात यह है, जो कभी नहीं हुआ। ‘कलियुग केवल नाम आधारा।
हमें केवल अनीति-अन्याय-अधर्म से युद्ध करना है और यदि कलिकाल के प्रभाव से बचना है, तो स्वयं में, स्वयं के विचारों में परिवर्तन लायें। नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन धारण करना है, पुरुषार्थी और परोपकारी बनना है तथा ‘माँ की भक्ति करनी है, ‘माँ का गुणगान करते रहना है। अपने आपको इतना बदल डालो कि सम्पूर्ण समाज प्रकाशित हो उठे। अपने तन को मंदिर बनाओ, अपने घर को मंदिर बनाओ, अपने गाँव को मन्दिर बनाओ, एक-न-एक दिन पूरा देश मंदिर बन जायेगा।
भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी जी ने कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे भवन्तु निरामय:। यह कहने वाला हमारा सनातनधर्म है। सद्गुुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चिन्तन है कि अगर मानवता की रक्षा करना है, सत्यधर्म की स्थापना करना है, तो नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जीना पड़ेगा। सनातनधर्म क्या है? नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी और परोपकारी जीवन तथा अष्टांग येाग अपनाना ही सनातनधर्म है।




























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