भोपाल। मध्यप्रदेश में थैलेसीमिया बीमारी की स्थाई चिकित्सा यानी ‘बोन मैरो ट्रांसप्लांट’ अब पूरी तरह नि:शुल्क होगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)मध्यप्रदेश और मेदांता फाउंडेशन (नई दिल्ली) के बीच एमओयू हुआ है। इसका लाभ उन परिवारों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम है। यह पहल ‘कोल इंडिया थैलेसीमिया बाल सेवा योजना’ के तहत की गई है। समझौते के मुताबिक पहले चरण में इंदौर, उज्जैन और देवास ज़िलों के मरीजों को शामिल किया जा रहा है।
मरीज के इलाज के साथ उनके आने-जाने और दिल्ली में रुकने का खर्च भी फाउंडेशन वहन करेगा। गौरतलब है कि निजी अस्पतालों में इसका खर्च 15 से लेकर 30 लाख रुपये तक आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि थैलेसीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है। अक्सर माता-पिता को यह पता नहीं होता कि इलाज की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध है। अब सरकारी प्रयास से न केवल आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि हज़ारों बच्चों की जान भी बचाई जा सकेगी।



























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