नई दिल्ली। केंद्रीय वन एंव पर्यावरण मंत्रालय ने देश में वन्य जीवों को बचाने के लिए खास बायोबैंक तैयार किए जाने की पहल की है। ये अपनी तरह के विशेष बैंक होंगे और यहां पर जानवरों के उन अंगों व चीजों को संजोकर रखा जा सकेगा, जो कि हिंसक घटनाओं या अन्य दुर्घटनाओं में होने वाले जानवरों के लिए प्रयोग किए जा सकें। इसका सबसे अधिक लाभ देशभर के चिडिय़ाघरों और वन क्षेत्रों को मिलेगा। आपात स्थिति में इन अंगों का प्रयोग जानवरों के लिए किया जा सकेगा।
पायलट योजना के लिए मंत्रालय ने देश के पांच प्रमुख चिडिय़ाघरों को शामिल किया है। इनमें दार्जीलिंग पश्चिम बंगाल, हैदराबाद तेलंगाना, बंगलुरु कर्नाटक, जूनागढ़ गुजरात और अगरतला त्रिपुरा के चिडिय़ाघरों को शामिल किया गया है। इन सभी केंद्रों के सीधेतौर पर हैदराबाद के केंद्र से जोड़ा गया है ताकि संबंधित मामलों के विशेषज्ञों के सुझाव का लाभ देश के अन्य चिडिय़ाघरों को भी मिल सके।
मंत्रालय के अनुसार, जिस प्रकार से इनसान के अंगों को संरक्षित करके उनका पुन: प्रयोग किया जा सकता है, उसी प्रकार जानवरों में भी इस तकनीक का प्रयोग संभव है। संरक्षित करने की श्रेणी में जिंदा जानवरों का रक्त, स्कीन समेत अन्य अंग और मृतकों ह्रदय, किडनी, फेफड़े, आंखें और अंडों के बाहरी कवच आदि शामिल हैं। इनकी मदद से प्रजातियों के प्रजनन का भी रास्ता खुलेगा।




























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