नई दिल्ली। पंजाब के लोगों के सिर पर कौन सा भूत सवार हो गया है या क्या मजबूरी है कि वे अपना घर, संपत्ति, सोना और ट्रैक्टर बेचकर विदेश चले जाना चाहते हैं? नए अध्ययन में कई खुलासे किए गए हैं।
इस प्रदेश के 13.34 फीसदी ग्रामीण परिवारों में से कम से कम एक सदस्य विदेश में बस चुके हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से प्रवासियों पर किए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि 19.38 प्रतिशत प्रवासी ऐसे हैं, जिन्होंने विदेश जाने का सपना पूरा करने के लिए अपनी संपत्ति बेच दी। आकलन के अनुसार भूमि, भूखंड/घर, सोना, कार और ट्रैक्टर का औसत मूल्य प्रति प्रवासी परिवार 1.23 लाख रुपए है, जो पूरे राज्य के लिए 5,639 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
जानकारी के अनुसार, लगभग 56 प्रतिशत परिवारों ने अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए पैसे उधार लिए। प्रवासी परिवारों के द्वारा उधार ली गई औसत राशि 3.13 लाख रुपए प्रति परिवार थी। राज्यस्तर पर प्रवास के लिए करीब 14,342 करोड़ रुपए उधार लिए गए।
कनाडा पसंदीदी देश
पंजाब छोड़कर जाने वालों में 42 फीसदी लोगों का पसंदीदा देश कनाडा है। इसके बाद दुबई (16 फीसदी), ऑस्ट्रेलिया (10 फीसदी), इटली (6 फीसदी), यूरोप और इंग्लैंड में 3 फीसदी लोग पहुंच रहे हैं। पंजाब छोड़कर दूसरे देशों में जाने वालों की संख्या 2016 के बाद अधिक बढ़ी है। अध्ययन के अनुसार यह संख्या 74 फीसदी तक है। आम तौर पर पंजाब के सभी हिस्सों से विदेश जाते हैं, लेकिन अध्ययन के अनुसार अमृतसर, गुरदासपुर, शहीद भगत सिंह नगर और फिरोजपुर जि़लों में प्रवासन की सीमा 30 प्रतिशत से अधिक है।
कारण है रोजगार की ्र
कमी और भ्रष्ट सिस्टम
अध्ययन में लगभग तीन चौथाई प्रवासी परिवारों ने प्रवासन के मूल कारण में रोजगार के अवसरों की कमी/अल्परोजगार, भ्रष्ट व्यवस्था और कम आय जैसे मुद्दों को गिनाया है। इसके अलावा 62 फीसदी ने सिस्टम में खराबी और 53 फीसदी ने ड्रग्स का प्रचलन व अन्य गैर-आर्थिक कारणों को भी प्रवासन का कारण करार दिया है। यह अध्ययन 22 जि़लों के 44 गांवों में करीब 9,492 घरों में से कुल 640 प्रवासियों और 660 गैर-प्रवासी परिवारों पर किया गया।




























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