प्रत्येक वर्ष पौष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी मनाई जाती है। रुक्मिणी अष्टमी के दिन व्रत रखा जाता है और पूजा की जाती है। रुक्मिणी अष्टमी के दिन देवी रुक्मिणी के साथ भगवान् श्री कृष्ण की पूजा का विधान है।
इस साल रुक्मिणी अष्टमी का व्रत 04 दिसंबर, दिन गुरुवार को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था, वे विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थीं। देवी रुक्मिणी को माँ लक्ष्मी का अवतार कहा गया है। कहा जाता है कि रुक्मिणी अष्टमी के दिन व्रत रखने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। साथ ही अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
रुक्मिणी अष्टमी का महत्त्व
हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, पौष माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी को धन की देवी माँ लक्ष्मी ने देवी रुक्मिणी के रूप में जन्म लिया था। रुक्मिणी के शरीर पर माता लक्ष्मी के समान ही लक्षण दिखाई देते थे, इसलिए उन्हें लोग लक्ष्मस्वरूपा भी कहते थे। मान्यता है कि जो कोई भी रुक्मिणी अष्टमी का व्रत रखते हैं, उस पर माँ लक्ष्मी देवी हमेशा अपनी कृपा बनाए रखती हैं।





























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