नई दिल्ली। पराली प्रबंधन के लिए किसानों और उद्यमियों में उदासीनता देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इसके लिए दी जाने वाली अनुदान राशि दोगुना करने का निर्णय लिया है। इस निमित्त लिखित आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि ताप विद्युत संयंत्रों और उद्योगों में धान के भूसे की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘टारफेक्शनÓ (फसल अवशेष को ‘जैव-कोयलाÓ में परिवर्तित करना) और ‘पेलेटाइजेशनÓ संयंत्र स्थापित करने के लिए उद्यमियों और कंपनियों को एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाती है। सीपीसीबी के मुताबिक इन संयंत्रों की स्थापना से पराली जलाने की समस्या का निदान करने में सहायता मिलती है और किसानों की आय भी बढ़ती है।
सीपीसीबी की वायु गुणवत्ता प्रबंधन शाखा के प्रमुख पीके गुप्ता द्वारा आदेश के अनुसार, मार्च 2023 में इन संयंत्रों की स्थापना के दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके तहत एकमुश्त अधिकतम वित्तीय सहायता राशि 14 से 28 लाख और 70 लाख से 1.4 करोड़ रुपये की गई थी, लेकिन किसानों और उद्यमियों की ओर से कुछ खास उत्साह दिखाई नहीं दिया।
श्री गुप्ता के मुताबिक संयंत्र लगाने के लिए प्राप्त आवेदनों की सीमित संख्या को ध्यान में रखते हुए ही इस सहायता राशि को दोगुना कर दिया गया है। अब यह राशि 28 से 56 लाख रुपये प्रति टन उत्पादन क्षमता के संयंत्र के लिए मानी जाने वाली पूंजीगत लागत का 40 फीसदी जो भी कम हो, और अधिकतम कुल वित्तीय सहायता भी 1.4 करोड़ रुपये प्रति प्रस्ताव से बढ़ाकर प्रति प्रस्ताव 2.8 करोड़ रुपये कर दी गई है।





























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