- पवित्रता, आनंद और शांति, मानवजीवन के अनमोलरत्न हैं।
- जब तुम दूसरों का सहारा बनोगे, तो ‘माँ’ तुम्हारा सहारा स्वयं बन जायेंगी।
- यदि शांति और निश्चिंतता चाहिए, तो परोपकारी बनो।
- मधुर वाणी बोलें और आहार की शुद्धता व पवित्रता पर ध्यान दें।
- सन्तुलित शाकाहार ही निरोगी जीवन का मूलमंत्र है।
- तनाव से मुक्त होना है, तो स्वयं को विषय-विकारों से मुक्त करो।
प्रस्तुति
अलोपी शुक्ला
संकल्प शक्ति





























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