ऊषाकाल की विशेष महिमा है। ब्रह्ममुहूर्त में, सूर्योदय से पहले उठने वालों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है तथा विद्या, बल और तेज में वृद्धि होती है, लेकिन इस नियम का पालन नित्यप्रति करना चाहिए। जो सूर्यादय तक सोते रहते हैं, वे नाना प्रकार की बीमारियों के शिकार होते हैं।
ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चिन्तन है कि ”मन का स्थान मस्तिष्क है, अत: मन को स्वस्थ, शान्त और सात्विक रखने के लिए सूर्योदय से पहले उठें और स्नानादि के बाद आज्ञाचक्र (मस्तक) पर कुंकुम का तिलक लगाएं। कुंकुम का तिलक पुरुष व महिलाओं, सभी के लिए उपयोगी है। इसमें सर्वदोषनाशक शक्ति रहती है। साथ ही प्राणायाम और ध्यान-साधना के लिए पन्द्रह मिनट का समय अवश्य दें। इन क्रियाओं को अपनाने से मन शान्त व सात्विक हो जाता है और जब मन स्वस्थ व सात्विक रहेगा, तो शरीर भी निरोगी रहेगा।
इतना ही नहीं, जीवन में उपासना का विशेष महत्त्व है। परिवारिक उत्तरदायित्त्व के साथ ही मानवता की सेवा, धर्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा जैसे मानवीय कर्तव्य का निर्वहन करते हुए परमसत्ता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की उपासना, मानवजीवन का मुख्य लक्ष्य है। लेकिन, इस लक्ष्य को पूरी तरह तब तक प्राप्त नहीं किया जा सकता, जब तक कि हम संसारिक विषय-वासनाओं और भोगों से विरत नहीं हो जाते।‘’
प्रस्तुति- अलोपी शुक्ला
(कार्यकारी सम्पादक: संकल्प शक्ति)





























Views Today : 4
Views Last 7 days : 254
Views Last 30 days : 1259
Views This Year : 7069
Total views : 107542
Who's Online : 0
Your IP Address : 216.73.217.31